Posts tagged ‘Zehra Nigah’

दिसम्बर 18, 2014

जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है

सुना है जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है !
सुना है शेर का जब पेट भर जाये
तो वो हमला नही करता ,
दरख्तों की घनी छाओँ जा कर लेट जाता है !
सुना है जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है !!
सुना है जब किसी नदी के पानी में
हवा के तेज़ झोंके जब दरख्तों को हिलाते हैं
तो मैना अपने घर को भूल कर
कौवे के अंडो को परों से थाम लेती है |
सुना है घोंसले से कोई बच्चा गिर पड़े तो ,
सारा जंगल जाग जाता है |
सुना है जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है !!
सुना है जब किसी नद्दी के पानी में
बये के घोंसले का गुन्दुमी साया लरज़ता है |
तो नदी की रुपहली मछलियाँ उसको
पडोसी मान लेती हैं |
नदी में बाढ़ आ जाये ,
कोई पुल टूट जाये तो ,
किसी लकड़ी के तख्ते पर
गिलहरी, सांप ,बकरी और चीता
साथ होते हैं |
सुना है जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है !!
ख़ुदा-वंदा , जलील-ओ -मोतबर , दाना-ओ-बीना
मुंसिफ-ओ-अकबर
मेरे इस शहर में
अब जंगलों ही का कोई क़ानून नाफ़िस कर
कोई दस्तूर नाफ़िस कर |
सुना है जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है !!

(ज़ेहरा निगाह)

Advertisements
%d bloggers like this: