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अक्टूबर 26, 2014

प्रेम भरे दो जीवन…

LoveStoryदोस्तों के आने से काफी पहले ही विक्टर रेस्त्रां पहुँच गया था| अंदर प्रवेश किया तो पाया कि पूरे रेस्त्रां में सिर्फ एक वृद्ध एक कोने में बैठा अकेले ही खा रहा था| थोड़ा नजदीक गया तो पाया कि उसने सामने मेज पर एक महिला की तस्वीर रखी हुयी थी और वह उस तस्वीर को लगातार देखते हुए खा रहा था|

विक्टर को लगा कि वृद्ध अवसाद से ग्रस्त है और तस्वीर में मौजूद महिला उसकी कोई खास रही होगी और शायद अब इस दुनिया में नहीं है और उसकी याद में वृद्ध दुखी है| उसने सोचा कि जब तक उसके दोस्त नहीं आते वह वृद्ध से बातें करके उसका मूड ठीक कर सकता है|

विक्टर वृद्ध के पास चला गया|

“माफ कीजिये, मैं थोड़ी देर आपके पास बैठ सकता हूँ?”

वृद्ध ने उसकी तरफ देखा, कुछ पल सोचा और कहा, “आओ बैठो यंगमैन”|

विक्टर ने तस्वीर की ओर इशारा करते हुए पूछा,” मेरा नाम विक्टर है| आप बड़े प्यार और दुख के साथ इस तस्वीर को निहार रहे थे, क्या यह  आपकी…?”

वृद्ध ने एक गहरी साँस लेते हुए कहा,” यह मेरी पत्नी की तस्वीर है| जेनिफर”|

“क्या अब वे आपके साथ नहीं हैं?”

“है तो साथ| मैं उसी के साथ हूँ”|

फिर आप इतने दुख से क्यों इस तस्वीर को देख रहे थे?

वृद्ध जैसे समय में कहीं खो गया|

“हम दोनों सत्रह साल के थे जब हम मिले| हमें एक दूसरे से प्यार हो गया| पर समय की करनी| युद्ध छिड़ गया था और मैं सेना में भर्ती हो गया| युद्ध के दौरान भी मैं उसी के बारे में सोचता रहता था| युद्ध के बाद मैं वापिस आया तो पाया कि उसका परिवार कहीं और चला गया था| मैंमें उसे तलाशने की बहुत कोशिश की पर किसी को उसके और उसके परिवार के बारे में नहीं पता था| दस साल मैं उसे खोजता रहा, किसी दूसरी युवती की और कभी आँख भर कर नहीं देखा, मिल कर बात करना तो दूर की बात है| लोग मुझे पागल कहने लगे| मैं उनसे कहता कि मैं वाकई पागल हो गया हूँ जेनिफर के प्यार में पागल!”

वृद्ध कुछ देर खामोश रहा तो विक्टर ने कुरेदा,”फिर?”

“मैं शहर शहर उसे खोजता रहा, जिस भी जगह जाता उसे खोजता| एक दौरे पर मैं केलिफोर्निया गया वहाँ एक सेलून में बाल कटवाते हुए मैं नाई से अपनी प्रेम कहानी और जेनिफर की खोज के बारे में बता बैठा| नाई सेलून में एक कोने में रखे फोन की तरफ गया और फोन पर अपनी बेटी से सेलून में आने को कहा|”

विक्टर के लिए वृद्ध की खामोशी एक पल के लिए भी अखर रही थी| उत्तेजना से भर उसने पूछा,” वही?”

वृद्ध की आँखों में चमक आ गई,” जेनिफर मेरे सामने खड़ी थी| उसने भी दस साल किसी युवक के साथ डेटिंग नहीं की| वह मेरा इंतजार करती रही| उसने अपने पिता और परिवार की एक नहीं सुनी और मेरा इंतजार किया|”

विक्टर को अपनी ओर उत्सुकता से देखता हुआ पाकर वृद्ध ने कहा'” मैंने वहीं जेनिफर के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा और उसके सहमति देने पर उसके पिता से अनुमति ली| अगले ही दिन हमने विवाह कर लिया| पचपन साल हम लोग विवाह के बाद साथ रहे| ”

“अब कहाँ हैं जेनिफर”|

“पांच बरस हुए, उसे अपना शरीर छोड़े| पर मेरे साथ वह हरदम बनी रहती है|  मैं विवाह की वर्षगाँठ और जेनिफर का जन्मदिन हमेशा सेलिब्रेट करता हूँ| मैं हमेशा उसकी तस्वीर अपने साथ रखता हूँ| रत को उसकी तस्वीर को चूमकर उसे शुभरात्री कह कर सोता हूँ|”

“दस साल आप दोनों ने एक दूसरे का इंतजार किया? अगर केलिफोर्निया में भी आपको जेनिफर न मिलती और दस साल और गुजर जाते तो?”

तो क्या? मैं तो सारी उम्र उसे तलाशता| वह भी मेरा इंतजार करती”|

“वाह! मैंने आज तक ऐसी प्रेम कहानी नहीं सुनी”|

“ये कहानी नहीं है यंगमैन| हमारा जीवन है”|

अब तो लोग दो चार साल भी विवाह के बंधन में नहीं ठहर पाते| तलाक ले लेते हैं|

“हम दोनों के बीच बहुत बहसें होती थीं पर कभी भी कुतर्क नहीं चले| मैं कुछ बातें कहूँ तुमसे यंगमैन”|

“जी कहिये”|

“मैं बहुत धनी रहा, पैसे के कारण नहीं बल्कि प्रेम के कारण| अपनी पत्नी से रोज इस बात को जाहिर करो कि तुम उससे प्रेम करते हो| लोग जलती हुयी मोमबत्ती की तरह होते हैं| हवा का झोंका आकर लौ बुझा सकता है इसलिए जब तक प्रकाश है उसका भली भांति आनंद लो, उसका सम्मान करो|”

वृद्ध ने अपनी पत्नी की तस्वीर उठाते हुए कहा,” अब मैं चलता हूँ|  मेरी बातें याद रखना|”

 

 

 [ एक सच्ची कथा – परिवर्तित रूप में ]

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सितम्बर 16, 2011

बाँस

बाँस टकराते हैं
आपस में,
चिनगारियाँ जन्मते हैं
माहौल जला देते हैं।

बाँस छिदवाते हैं
छाती अपनी,
लहरियाँ जन्मते हैं
धुनें सुना देते हैं।

(रफत आलम)

जून 2, 2011

वक्त्त की किताब

लंबा इतिहास रहा है
क्रंदन और रुदन का
आदमी का आदमी द्वारा बेइंतेहा शोषण
बलवान की कमज़ोर पर बरतरी
वही जुल्मों सितम का निजाम है जो के था
अभी भी जारी है सफर घसीटी जाती
लहू में सनी अनगिनत गुमनाम लाशों का
जो बेसबूत फूँक दी जाती हैं
नए नास्तियों के गैस चैम्बरों में
या शार्कों के हवाले कर दी जाती हैं
अभी भी उड़ रहे हैं मीलों ऊपर फौलादी बाज़
जिनके पंजों में सिमटी हज़ारो टन बारुद
जाने किन खलिहानों को स्वाह करने वाली है
जाने कितनी बस्तियां जिंदा जलाई जानी हैं
चाँद के गले में फंदा फ़ेंक कर
सारी रोशनी आपने घर ले जाने कि तैयारी है
नीव रखी जा चुकी है न्यू वर्ल्ड आर्डर की
अभी कहाँ बुझी है अँधेरे पिशाचों की विकराल प्यास
जिसे सदा से
बेगुनाहों का उजला सुर्ख खून चाहिए होता है
आदमियत का वही बेरहम कातिल
इन्साफ की मूरत बना बैठा है

आज़ादी के बहाने
रेड इंडियनों का शिकार कर
हिरोशिमा-नागासाकी से चलता हुआ
थियेनमान चौक पर दम लेकर
ईराक, अफगानिस्तान और फिलिस्तीन तक
आदमियत को रौंदने के बाद
टयूनेशिया-लीबिया की तरफ
बढ़ गया है “चंगेजों” का कारवाँ
खूनी अध्याय जुड़ते जा रहे हैं
वक्त की किताब में।

दरअसल इन्साफ!
ताकत का बड़ा मजाक है
कमज़ोर के अस्तित्व के साथ
एक कारगर औजार है
जिसके सहारे
आसानी से शोषण होता है
बदनसीब सर्वहाराओं का
वे सपने दिखा कर
जिनकी वास्तविकता
पिंजरे में कैद पंछियों की
उड़ान के ख्यालों के सिवा कुछ नहीं

काश!
मुक्त हो कभी इंसानियत
सरहदों और हुक्मरानों की कैद से
धरती वही स्वर्ग हो जाए
जो कभी थी
नीले आकाश की तरफ
उड़ाने भरें
आज़ाद उमंगें और परिंदे।

कवि महोदय अभी तुमको
अनगिनत अध्याय हैं पढने
ज़ुल्म की काली किताब के,
सदियों की उदासी ठहरा कर
अनगिनत रुला देने वाले गीत रचने हैं।

(रफत आलम)

अप्रैल 27, 2010

महासंग्राम

बार बार की खिटपिट से अच्छा होता है

एक बार का महासंग्राम

युद्ध के बाद का इतिहास ही बताता है

कौरवों और पाण्डवों का पक्ष

वरना ज्यादातर तो

बलरामों की भीड़ ही हुआ करती है!

…[राकेश]

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