Posts tagged ‘Vishwas’

मार्च 6, 2015

लीक पर वे चलें जिनके…

लीक पर वे चलें जिनके
चरण दुर्बल और हारे हैं
हमें तो जो हमारी यात्रा से बने
ऐसे अनिर्मित पन्थ प्यारे हैं

साक्षी हों राह रोके खड़े
पीले बाँस के झुरमुट
कि उनमें गा रही है जो हवा
उसी से लिपटे हुए सपने हमारे हैं

शेष जो भी हैं-
वक्ष खोले डोलती अमराइयाँ
गर्व से आकाश थामे खड़े
ताड़ के ये पेड़;
हिलती क्षितिज की झालरें
झूमती हर डाल पर बैठी
फलों से मारती
खिलखिलाती शोख़ अल्हड़ हवा;
गायक-मण्डली-से थिरकते आते गगन में मेघ,
वाद्य-यन्त्रों-से पड़े टीले,
नदी बनने की प्रतीक्षा में, कहीं नीचे
शुष्क नाले में नाचता एक अँजुरी जल;
सभी, बन रहा है कहीं जो विश्वास
जो संकल्प हममें
बस उसी के ही सहारें हैं ।

लीक पर वें चलें जिनके
चरण दुर्बल और हारे हैं,
हमें तो जो हमारी यात्रा से बने
ऐसे अनिर्मित पन्थ प्यारे हैं ।

(सर्वेश्वरदयाल सक्सेना)

अप्रैल 15, 2013

मेरे गीत तुम्ही गाओगे

नयन के बादल घने हो गये

क्यों इतने अनमने हो गये

सुनो सुनो ऐ बंधु!

न रूठो, मुझको जीत तुम्ही पाओगे,

मेरे गीत तुम्ही गाओगे…|

छोडो तुम यह रोना-धोना

चलो सजाओ स्वप्न सलोना

इतना तो विश्वास करो तुम

मेरी प्रीत तुम्ही पाओगे

मेरे गीत तुम्ही गाओगे…|

यह मौसम तूफानी देखो

कितना रेगिस्तानी देखो

ऐसे में मालूम मुझे था

मेरे मीत तुम्ही आओगे

मेरे गीत तुम्ही गाओगे…|

तुमने जीवन दान दिया है

गीतों का वरदान दिया है

इन्हें अमर भी कर जाए जो

वह संगीत तुम्ही लाओगे

मेरे गीत तुम्ही गाओगे…|

{कृष्ण बिहारी}

मार्च 15, 2011

बस आदमी मिलता नहीं…

विश्वास फरेब का नाम है बुजुर्गों ने कहा है
बता तो सही यार आस्तीन के पीछे क्या है

न शिकायत है किसी से न लबों पे गिला है
हम फकीरों के दिल में सबके लिए दुआ है

आज तो सारा माहौल ही कालिख से पुता है
आप अपना दामन बचाइए आपको क्या है

ज़ख्मो को खुला रख के घर से निकलता हूँ
मुझे मालूम है नमक भरने को दिन खड़ा है

तुम्हारा वादा-ए-मुहब्बत ज़बानी था और रहा
हमारा हर्फे वफ़ा दिल के वरक पे लिखा है

वक्त का उधार न चुका साँसों की पूंजी से
आदमी ने आखिर जीवन भी सूद में दिया है

बसे देखे दुनिया में सातों जातें चारों मज़हब
नहीं मिला तो बस आदमी ही नहीं मिला है

मैंने तो तेरी रहबरी का भरम रखा है आलम
ये रास्ता मंजिल को नहीं जाता मुझे पता है

(रफत आलम)

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