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फ़रवरी 21, 2017

अमृता शेरगिल के चित्र को देख कर …

amritashergil1अंधी रात का तुम्हारा तन :

दाहिने हाथ की उठी हथेली ;

नग्न कच्चे कुचों –

कटी के मध्य देश- –

लौह की जाँघों से

आंतरिक अरुणोदय की झलक मारता है

ओ चित्र में अंकित युवती:

तुम सुंदर हो!

मौन खड़ी भी तुम विद्रोही शक्ति हो!

(केदारनाथ अग्रवाल – ०९ अक्टूबर १९६०)

 

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