Posts tagged ‘Twitter’

अगस्त 3, 2015

फेसबुक से बाहर वास्तविक जीवन में फेसबुकीय सिद्धांतों का नतीजा

lifeoutoffacebook

अप्रैल 28, 2011

Twitter : देवनागरी के सामने खड़ा एक जिन्न

अंग्रेजी शब्द Clone को देवनागरी में आसानी से क्लोन लिख सकते हैं क्योंकि आधे “” की गुंजाइश है।

अंग्रेजी शब्द Pure आसानी से देवनागरी में प्योर लिखा जा सकता है। आधे की उपस्थिति है।

पर जो शब्द अंग्रेजी के T
अक्षर से शुरु हों उनके साथ क्या किया जाये?

हिन्दी में या से शुरु होने वाले शब्दों को आसानी से रोमन में लिखा और पढ़ा जा सकता है।

अंग्रेजी वर्णमाला के T को हिंदी के और दोनों के संदर्भ में उपयोग में लाया जाता है और कोई दिक्कत नहीं आती। अगर रोमन में ऐसा लिखना हो कि ” दधीचि बड़े त्यागी महात्मा थे ” तो इस वाक्य के त्यागी शब्द को आसानी से रोमन में Tyagi लिखा और पढ़ा जा सकता है पर जब अंग्रेजी शब्द Tuning को देवनागरी में टयूनिंग लिखा जाता है तो क्या वह एकदम सही है? क्योंकि कायदे से इसे Tayuning पढ़ा जाना चाहिये।

अंग्रेजी के  शब्द Twin के साथ क्या किया जाता है जब इसे देवनागरी में लिखा जाता है?  इसे लिखते हैं ट्विन या ट्वीन, जो कि कतई अंग्रेजी के मूल शब्द के अनुरुप उच्चारण वाले शब्द नहीं हैं।

यही दिक्कत माइक्रो ब्लॉगिंग माध्यम के शब्द Twitter को देवनागरी लिपि में लिखने की है।

अगर इसे ट्विटर लिखें तो कायदे से इसका हिन्दी में इसका सही उच्चारण  TiwTar हो जायेगा जो कि अंग्रेजी के मूल उच्चारण से एकदम अलग है।

अगर इसे टविटर लिखें तो हिन्दी में इसका उच्चारण TawiTar हो जाता है जो कि पुनः अंग्रेजी के मूल उच्चारण से अलग है। तो क्या देवनागरी में इस शब्द को लिखा ही नहीं जा सकता।

अंग्रेजी के सही उच्चारण के तहत इस शब्द में की ध्वनि आधी बैठेगी, पर पहले ही अक्षर के रुप में आधे को कैसे लिखा जायेगा?

इस समस्या को इस तरह भी समझ सकते हैं – अगर Twitter शब्द के पहले अक्षर को हिन्दी में के बजाय की ध्वनि मिल जाती तो सही उच्चारण का सही लेखन होता त्वितर या त्विटर न कि तिवतर या तिवटर

हिन्दी की खासियत ही यही है कि जैसा लिखा जाता है वैसा ही पढ़ा जाता है और जैसा बोला जाता है वैसा ही लिखा भी जाता है।

हिंदी शब्दों को तो रोमन लिपि में लिखा जा सकता है पर ऐसा जरुरी नहीं कि देवनागरी भी अंग्रेजी शब्दों को ऐसी सड़क मुहैया करा दे जिस पर अंग्रेजी के शब्द सरपट दौड़ सकें।

ऐसी स्थितियों में जुगाड़ से काम चलाना पड़ता है।

सितम्बर 10, 2010

खत-ओ-किताबत के मिटते निशां

पत्र लिखना मनुष्य की एक बेहतरीन पूंजी और कला हुआ करती थी। पत्र चाहे मित्रों को लिखे जायें या करीबी लोगों को, पत्र लेखन का कोई सानी नहीं है। पत्र चाहे मशहूर लेखक एक दूसरे को लिखें या साधारण मनुष्य अपने करीबी लोगों को लिखें, पत्र लिखना अपनी भावनाओं को प्रदर्शित करने का एक बेहतरीन जरिया हुआ करता था।

पत्र केवल व्यक्ति की भावनाओं का ही संप्रेषण नहीं करते बल्कि वे अपने युग के दस्तावेज भी होते हैं।

एस.टी.डी फोन आये और पत्र लेखन की कला पर पहला कुठाराघात हुआ। बहुतायत में लोग लिखने से ज्यादा फोन पर बतियाने में ज्यादा विश्वास रखने लगे। कुछ लोग तो पत्र लिखना ही भूल गये। कुछ लोग अभी तक पत्र लेखन का मोह नहीं छोड़ पाये और इस कला को जिंदा रखे रहे।

भाग्य से तभी इंटरनेट का चलन शुरु हो गया और ई-मेल की सुविधा के जन्म के साथ ही इंटरनेट का उपयोग करने वाले बहुत सारे लोग ई-मेल के रुप में पत्र लेखन की विधा को कायम रखे रहे।

इस बीच पोस्टमैन नामक जीव को कुरियर मैन नामक जीव ने स्थान्तरित कर दिया।

सेल फोन मनुष्य के जीवन में दस्तक दी और बाद में SMS और नेट-चैट जैसी सुविधाओं ने लोगों के लिखने का अंदाज़ ही बदल दिया और शब्द छोटे से छोटे रुप में सुहाने लगे लोगों को। हालत ऐसे हो गये कि गणितीय अंकों ने वर्णमाला के शब्दों में घुसपैठ कर दी और Great अब Gr8  हो गया। चलिये कोई खास बात नहीं है।

इस काल के बाद अस्तित्व में आयीं सोशल नेट्वर्किंग साइट्स जैसे ऑरकुट, फेसबुक और टविटर। और अब यह जानना रोचक होगा कि क्या अभी भी लोग व्यक्तिगत पत्र लिखते हैं अपने करीबी लोगों को?

सोशल नेट्वर्किंग साइट्स निस्संदेह लोगों को एक दूसरे के बारे में सूचनायें देती रहती हैं परन्तु ये निश्चित रुप से वह आनंद प्रदान नहीं कर पातीं जो कि व्यक्तिगत लम्बे पत्रों या ई-मेल के मिलने से प्राप्त होता था।

प्रकृति के इस नियम का निषेध नहीं किया जा सकता कि समय अपने साथ परिवर्तन लाता ही लाता है परन्तु इन सब परिवर्तनों के बीच एक कला के खोने के अहसास को प्रकट तो किया ही जा सकता है। उस खोयी हुयी कला को याद तो किया ही जा सकता है।

शायद समय आ गया है जब लोग घरों  में छोटे बच्चों को रात में सुलाते समय कहानियाँ सुनाते हुये अपनी बात कुछ ऐसे शुरु कर सकते हैं,
” यह उस समय की बात है जब लोग पत्र लिखा करते थे”।

पर वास्तव में तो बच्चों को रात में कहानियाँ सुनाने की कला भी लुप्त हो ही चुकी है।

…[राकेश]

जून 22, 2010

रावण और अमिताभ बच्चन : नैतिक और जिम्मेदार पत्रकारिता का क्या होगा

इस बात से इंकार करना मुश्किल हो जायेगा कि पिछले दस पंद्रह सालों में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पूरी तरह से भारत में बस जाने के बाद से TRP के भूत और रिपोर्टंग में कुछ भी कह देने की प्रवृति ने प्रिंट मीडिया को भी अपने वश में कर लिया है और अब बहुत सारे पत्रकार रिपोर्ट करने से पहले मामले की थोड़ी सी भी छानबीन करना जरुरी नहीं समझते।

सबसे पहले – सबसे आगे – सबसे तेज, जैसे शब्द पत्रकारिता के बेहद जिम्मेदारी भरे कर्तव्य पर जल्दबाजी के कारण गैर-जिम्मेदारी का मुलम्मा चढ़ाने में कामयाब हो गये हैं। अब किसी भी बात का बतंगड़ बना दिया जाता है। झूठ को इतनी शक्ति से और जोर शोर से प्रसारित और प्रचारित किया जाता है कि एकबारगी जो बताया जा रहा है वह सच लगने लगता है और अगर पाठक या दर्शक अपनी आँखों से न देख लें तो वे रिपोर्ट की गयी बातों को ही सच मान लेते हैं।

हालात उस निम्न स्तर तक पहुँच गये हैं जहाँ अगर मीडिया गलत रिपोर्टिंग करता हुआ पकड़ा भी जाये तो वह कोई क्षमा याचना नहीं करता बल्कि उसके द्वारा सीनाजोरी वाली प्रवृति ही ज्यादा दिखायी जाती है।

लोकतंत्र का यह स्तम्भ कभी बेहद मजबूत, स्वस्थ, निष्पक्ष, और कर्तव्यपरायणता हुआ करता था और जवाबदेही की भावना से ओतप्रोत रहा करता था पर बदले समय ने इसे भी बहुत हद तक बाजारु बना दिया है और इसके सरोकारों को पूर्वाग्रहों से ग्रस्त होने के कारण संदेहास्पद बना दिया है।

चिंताजनक बात यह है कि यह न तो लोकतंत्र के लिये अच्छा है और न ही मीडिया के लिये। भेड़िया आया की तर्ज पर यदि मीडिया की झूठे और गैर जिम्मेदार होने की छवि बनती चली जायेगी तो दिन दूर नहीं जब इसकी विश्वसनियता बिल्कुल ही खत्म हो जायेगी।

यूँ तो अमिताभ बच्चन से जुड़ी नवीनतम घटना छोटी सी है पर यह मीडिया की गैर जिम्मेदाराना हरकत को स्पष्टत: दर्शाती है इसलिये इस घटना को उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया जा सकता है।

अमिताभ बच्चन ने ट्विटर पर फिल्मफेयर के सम्पादक जितेश पिल्लई को रावण फिल्म के ऊपर निम्नलिखित ट्विट्स लिखे।

@jiteshpillaai  Yes it was all there, but sadly edited. Abhishek’s erratic behavior was due to symbolic 10 heads visually appearing..contd

@jiteshpillaai  contd ..and each giving him different attitudes to adopt for a situation, he would then finally shake them off and decide ..

@jiteshpillaai  ..in the edit all the visual heads got cut and you see a confused Beera expression and wonder why .. it was after he removed

@jiteshpillaai  .the other head visuals from his thinking.. in the edit you see the after effect of that thinking process, hence inconsistent

और मीडिया और समाचार पत्रों ने अमिताभ द्वारा लिखी बातों को इस बात के रुप में प्रचारित किया कि “अमिताभ रावण फिल्म की एडिटिंग से नाराज हैं“।

अमिताभ फिल्म के केवल  उन दृष्यों की बात कर रहे हैं जिन दृष्यों में बीरा द्वारा अपने सिर को इधर उधर हिलाने और उस वक्त कुछ जिबरिश सा कहने को दिखाया गया है, पर पत्रकारों ने बिना पूरी बात समझे प्रचारित करना शुरु कर दिया कि अमिताभ रावण के संपादन से नाराज हैं।

अमिताभ बिल्कुल रावण के संपादन या निर्देशन या पूरी फिल्म से ही नाराज हो सकते हैं परन्तु उनके जिन ट्विट्स को उदाहरण के तौर पर मीडिया ने उठाया है वहाँ वे कतई वे बातें नहीं कह रहे हैं जो मीडिया प्रचारित कर रहा है।

कुछ रिपोर्ट्स तो कल्पना में इतना आगे बढ़ गयी हैं कि वहाँ ऐसा अमिताभ बच्चन के ब्लॉग के हवाले से लिखा है जबकि अमिताभ ने अपने ब्लॉग पर रावण की तारीफ में ही एक संक्षिप्त सा ब्लॉग लिखा था। जाहिर है लिखने वाले पत्रकारों ने न उनका ब्लॉग पढ़ा और न ही ढ़ंग से उनके ट्विट्स ही बाँचे।

जाहिर है कि ऐसे सनसनीखेज शीर्षक और खबरें देने से रिपोर्ट को ज्यादा फोकस मिल सकता है पर इस प्रक्रिया में पत्रकारिता की जिम्मेदारी और नैतिकता का क्या हश्र हो रहा है?

बात छोटी सी है पर यही सब बहुत महत्व के मामलों में भी हो रहा है।

क्या चल रहा है यह?

सबसे चिंताजनक बात है कि ऐसी निम्न कोटि के हथकंडों भरी पत्रकारिता के प्रचलन में आने से नैतिकता भरी पत्रकारिता करने वाले बेहद प्रतिभावान पत्रकार और मीडियाकर्मी पीछे रह जाते हैं। उन्हे पुरातनपंथी कहकर पीछे ढ़केल दिया जाता है और उन्हे कुंठा में जीने को विवश किया जाता है।

ऐसी प्रवृति पत्रकारिता जैसे समाज के लिये बेहद महत्वपूर्ण और सम्मानजनक क्षेत्र के लिये शुभ नहीं है।

मई 28, 2010

ट्विटर मैनिया

“ सर आप भी ट्विटर ज्वाइन कर ही डालो अब “। सेक्रेटरी ने अपने बॉस से अनुरोध किया।
उसके बॉस को देश के टॉप के दस बारह बड़े फिल्मी सितारों में से एक माना जा सकता है।
“ अरे सब टाइम पास… टाइम बेकार करने का मामला है “।
“नहीं सर ऐसा नहीं है। फेसबुक की लहर के बाद ट्विटर ने एक आंधी तूफान की तरह आकर सबको अपनी गिरफ्त में ले लिया है । …सोशल नेट्वर्किंग का यह प्लैटफार्म फ्री की पब्लिसिटी ला देता है । लाखों फैन्स तक आप अपनी बात तुरन्त पहुँचा सकते हैं । इसके लिये मीडिया की बाट जोहने की जरुरत भी नहीं है ।
हींग लगे न फिटकरी और रंग चोखा आये की कहावत वाला  मामला समझ लीजिये“।
“पर यार मुझे तो कम्प्यूटर से बोरियत होती है “। सितारे ने कहा।
“सर कौन सा आपको कम्प्यूटर पर प्रोग्रामिंग करनी है। बड़ी बड़ी उम्र वाले लोग ट्विटर यूज कर रहे हैं। एक बार आप शुरु कर देंगे तो सब आसान लगने लगेगा। मेरी बात आप मानो, इससे अच्छा साधन और मौका नहीं मिलेगा फैन्स बनाये रखने का “।
“ पर बात क्या करेंगे रोज के रोज फैन्स से? ये बाकी लोग क्या बातें करते हैं अपने फैन्स से “?
“सर जी आप मानोगे नहीं आजकल तो हमारी इण्डस्ट्री वाले लोग अपने सम्बंधी और मित्रों के साथ भी ट्विटर पर ही सम्पर्क करते हैं। भले ही दिन में सौ बार उनसे फोन पर बात कर लेते हों परन्तु ट्विटर पर भी एक दो लाइन जरुर लिख डालते हैं। आम फैन्स लोग इन्ही बातों को पसंद करते हैं उन्हे लगता है कि सितारों की बेहद निजी बातचीत को वे सीधा पढ़ रहे हैं बिना किसी परदे के। सर जी प्रेमी प्रेमिका तक ट्विटर पर एक दूसरे से सम्पर्क करते दिखायी देते हैं “।
सितारे को अपनी ओर गौर से देखता पाकर सेक्रेटरी ने बात आगे बढ़ायी,” ट्विटर का इस्तेमाल अपनी मार्केटिंग करने में बहुत अच्छे ढ़ंग से हो सकता है और लोग ऐसा कर भी रहे हैं। ऐसे ऐसे सितारे, जिन्होने अपने बारे में ऐसा प्रसिद्ध कर रखा है या करवा रखा है कि वे हद दर्जे के प्राइवेट व्यक्ति हैं या उनकी प्रवृति या प्रकृति एक बहुत ही अंतर्मुखी किस्म के व्यक्ति की है और वे भीड़ से मिलने में या लोगों से खुलने में बहुत शर्म महसूस करते हैं, अपनी फिल्म रिलीज होने के मौके पर एकाएक फेसबुक और ट्विटर जैसे प्लैट्फार्म्स पर सक्रिय हो जाते हैं “।
“ कौन कौन पहुँच गये हैं वहाँ “
“ लगभग सभी वहाँ पहुँच गये हैं बल्कि मैं तो कहुँगा कि आप ही रह गये हो “
सितारे को सोचने वाली मुद्रा में पाकर सेक्रेटरी ने आगे कहा,” सर, बाजार में छवि प्रशंसकों की संख्या पर निर्भर तो करती ही है। और आपस में प्रतियोगिता एक सत्य है जिसे नकारना बड़ा मुश्किल है। आजकल मीडिया द्वारा जबर्दस्ती खड़े किये गये भ्रम के कारण ऐसा माहौल बना दिया गया है जिससे लगे कि जिसके ट्विटर पर जितने ज्यादा फॉलोवर वह उतना ही बड़ा सितारा है। आज ट्विटर पर न होने को इस रुप में भी लिया जा सकता है कि आपकी मार्केट वल्यू कम हो गयी है। मुझे माफ करें पर कुछ लोग तो ऐसा प्रचार भी कर सकते हैं कि आपका मार्केट ही खत्म हो गया है। ट्विटर पर जाना तो बनता ही बनता है “।
“अच्छा ट्विटर पर गये भी और उतने फैन्स नहीं जुड़े जितने और सितारों के हैं तो और ज्यादा भद पिटेगी। अभी कम से कम वहाँ न होने से इस बात का खतरा तो नहीं है। मैं कोई बहुत ज्यादा ओपन तो हूँ नहीं अपने फैन्स के साथ “
“सर मेरे पास उसकी स्कीम है। और आप फैन्स के साथ रुबरु तो बैठे नहीं है। जैसे आप फिल्मों में एक्टिंग करते हो ऐसी ही ट्विटर पर अपने शब्दों के द्वारा भी कर सकते हो। मेरी बात मानो, यह बहुत अच्छा मौका है बाजार पर कब्जा करने का ”
“ पर फैन्स वाली स्कीम क्या है तुम्हारे पास “?
“सर आप नाराज मत होना। आप बस मन से तैयार हो जाओ ट्विटर पर आने को और वहाँ पर आपके छा जाने का सारा बंदोबस्त मैं कर लूंगा “
” तब भी कुछ तो बताओ “
“सर जो आपके फैन्स हैं वे तो आपके ट्विटर पर जाते ही आपको फालो करना शुरु कर देंगे। लाखों लोग ऐसे हैं जिन्हे किसी भी सितारे को फालो करना है और कुछ ही दिन में वे आपको भी फालो करना शुरु कर देंगे पर…”
“पर “?
“पर मेरी योजना इन लोगों पर निर्भर रहने की नहीं है “।
“फिर ” सितारे की उत्सुकता बढ़ गयी थी।
“सर आपके ट्विटर ज्वाइन करने को मै इतनी बड़ी घटना बना दूँगा कि  बाकी  सब सितारे आपके सामने फीके लगने लगें। वहाँ तो सब नम्बरों का खेल है “।
सितारे को अपनी ओर देखता पाकर वह आगे बोला,” थोड़ा पैसा खर्च करना पड़ेगा। कम्प्यूटर सैंटर्स …, दूसरी जगहों पर। सब मेरे दिमाग में है कि कहाँ करना है और कैसे करना है “।
सितारा ऐसी उत्सुकता से भर गया था जैसे किसी जासूसी उपन्यास का प्लॉट सुन रहा हो।
” सर जी आपके ट्विटर पर आने के पहले दिन कोई एक लाख से भी ज्यादा लोग, मतलब ट्विटर एकाऊंट्स, आपको फालो करेंगे। दूसरे दिन और ज्यादा ट्विटर एकाऊंटस आपको फालो करना शुरु कर देंगे। …और सारा काम अलग अलग जगहों से करवायेंगे “।
“शुरु के दो दिन में सबसे ज्यादा फालोवर्स को आकर्षित करना मीडिया में न्यूज बनायेगा ही बनायेगा और जो भी आपको फालो नहीं कर रहा होगा वह महसूस करेगा कि वह पीछे छूट गया है और जल्दी से जल्दी इस मुहीम में जुट जायेगा। हमारे … ट्विटर एकाऊंट्स आपकी फैन्स लिस्ट में नम्बर बढ़ायेंगे  बाकी काम आपके फैन्स जो ट्विटर पर सक्रिय होंगे वे करेंगे ही करेंगे “।
“अरे यार स्कैंडल न हो जाये बाद में “
“सर कुछ नहीं होगा आप तो कहीं भी पिक्चर में नहीं आओगे। मैं भी कहीं से सीधे सीधे तौर पर इस सबसे सम्बंधित नहीं रहुँगा। मैने सब प्लान बना लिया है “।
सितारा सोच में पड़ गया।
“सर ज्यादा सोचो मत। आज से करीब 20  दिन या एक माह बाद आप ट्विटर पर अवतरित होओगे, तब तक हमारे काम के लिये ट्विटर एकाऊंटस बन चुके होंगे। और आप तो अपने किसी परिचित सितारे की मार्फत ट्विटर पर जाओगे, ज्वाइन करने से 1-2 दिन पहले आप ट्विटर का जिक्र छेड़ोगे और अपने दोस्तों से सीखोगे कैसे ट्विटर का इस्तेमाल किया जाये “|
सितारे ने पूछा,” क्या वाकई सितारे ट्विटर पर प्रशंसकों की संख्या को लेकर इतने गंभीर हैं “।
“सर हाल ही में घटा एक किस्सा सुनाता हूँ। कुछ दिन पहले किसी तकनीकी समस्या के कारण ट्विटर पर मौजूद सितारों के प्रोफाइल्स में प्रशंसकों की संख्या नगण्य हो गयी थी और एकदम से सितारे इस परिवर्तन के बारे में लिखने लगे थे। जाहिर है कि कहीं न कहीं ऐसी बात ने उन्हे परेशान तो किया ही था “।
सितारा किसी सोच में डूब गया।
“सर ज्यादा सोचो मत। इतना बड़ा काम नहीं है ये। रिस्क कतई नहीं है। मैं सब काम ऐसे तरीके से करुंगा कि किसी को कुछ खबर नहीं होगी“।
“ओ.के. देन लेट्स डू इट “

…[राकेश]

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