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मई 25, 2010

स्वयं की बुराइयों का भय

मन डरता है

गुलाब के उस फूल की भाँति

जिसे भय हो कि

जब उसे चाहने वाला

उसे छूने लगेगा

तो उसके हाथों में

कहीं काँटे न चुभ जायें

…[राकेश]

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