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जनवरी 15, 2011

तेरे जाने के बाद…(कविता – रफत आलम)

 

कल पतंग का दिन है
गुलाबी पतँग का एक टुकड़ा
आई लव यू लिखा हुआ
कुछ संजोये-संभाले रखे गए खत
प्यार की निशानियाँ थी
साल हा साल जिनके साथ
हमने सपने साकार किये थे
फूल चुने थे खारों के दर्द सहे थे
जानदार थी जिंदगी
नन्हे से घरोंदे में
बहुत खुशगवार थी जिंदगी
मगर वक्त के अबूझ चौराहे पर
सितारों की सिम्त मुड गयी तेरी राह
तेरे जाने के बाद
मैंने खुद ही अँधेरे का सफर चुन लिया है
किरची किरची हुए अहसास के बीच
जिंदगी क्या है अब
मौत की दुआ के सिवा

(रफत आलम)

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