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जुलाई 9, 2011

तुम्हारे बिना : बदरंग जीवन

मेरे तकिये के
अनगिनत गिलाफ बदल गए हैं
गए बरसों में
तुम्हारा सिरहाना अब भी
वैसा ही है
बस मेरे आँसुओं ने
रेशमी तकिये के
चंद फूल बदरंग किये हैं।

वीरान करवटों ने
बिस्तर के तुम्हारे वाले
खाली हिस्से में
लाखों बार तलाश किये हैं
तुम्हारे जिस्म के खो गये तिलिस्म
जागती आँखों ने
अक्सर यूँ ही किया है
सुबह होने का इन्तेज़ार।

(रफत आलम)

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