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फ़रवरी 9, 2015

प्यारे बच्चों…

प्यारे बच्चो, हम तुम्हारे काम नहीं आ सके । तुम चाहते थे हमारा क़ीमती
समय तुम्हारे खेलों में व्यतीत हो । तुम चाहते थे हम तुम्हें अपने खेलों
में शरीक करें । तुम चाहते थे हम तुम्हारी तरह मासूम हो जाएँ ।

प्यारे बच्चो, हमने ही तुम्हें बताया था जीवन एक युद्धस्थल है जहाँ
लड़ते ही रहना होता है । हम ही थे जिन्होंने हथियार पैने किये । हमने
ही छेड़ा युद्ध हम ही थे जो क्रोध और घृणा से बौखलाए थे । प्यारे
बच्चो, हमने तुमसे झूठ कहा था ।

यह एक लम्बी रात है । एक सुरंग की तरह । यहाँ से हम देख सकते
हैं बाहर का एक अस्पष्ट दृश्य । हम देखते हैं मारकाट और विलाप ।

बच्चो, हमने ही तुम्हें वहाँ भेजा था । हमें माफ़ कर दो । हमने झूठ कहा
था कि जीवन एक युद्धस्थल है ।

प्यारे बच्चो, जीवन एक उत्सव है जिसमें तुम हँसी की तरह फैले हो ।
जीवन एक हरा पेड़ है जिस पर तुम चिड़ियों की तरह फड़फड़ाते हो ।

जैसा कि कुछ कवियों ने कहा है जीवन एक उछलती गेंद है और
तुम उसके चारों ओर एकत्र चंचल पैरों की तरह हो ।

प्यारे बच्चो, अगर ऐसा नहीं है तो होना चाहिए ।

(मंगरेश डबराल)

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दिसम्बर 4, 2013

सर्द काली रात का इलजाम

इंतज़ार की रातेंtum-001

ठंडी

काली

लम्बी अँधेरी  सुरंग जैसी

पता  नहीं

रहूँगा भी या नहीं

मिलने तक

एक कतरा रौशनी|

तुम न थीं जब

तो जिंदा था ही

पर दुनिया ऐसी ही थी…

बस खुद में मैं नहीं था,

बदला क्या है तुमसे…

मैं कभी समझूंगा भी या नहीं…

तुम्हारे न होने से मैं

मर तो नहीं जाऊँगा लेकिन…

तुम्हारे बाद लेकिन फिर

मैं…

मैं रहूँगा भी या नहीं…

हरेक तन्हाई में तुम मेरे पास होती हो

तुम्हारे बिन

हरेक महफ़िल में

तन्हा ही रहूँगा मैं…

तेरी निगाहें-मुहब्बत का अहसान है मुझ पे

औ’ मेरी हर सर्द काली रात का  इलजाम  है तुझ  पे

Rajnish sign

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