Posts tagged ‘Shakti’

फ़रवरी 21, 2017

अमृता शेरगिल के चित्र को देख कर …

amritashergil1अंधी रात का तुम्हारा तन :

दाहिने हाथ की उठी हथेली ;

नग्न कच्चे कुचों –

कटी के मध्य देश- –

लौह की जाँघों से

आंतरिक अरुणोदय की झलक मारता है

ओ चित्र में अंकित युवती:

तुम सुंदर हो!

मौन खड़ी भी तुम विद्रोही शक्ति हो!

(केदारनाथ अग्रवाल – ०९ अक्टूबर १९६०)

 

जुलाई 8, 2010

भारत पाक शांति प्रयास : पाक शायर अहमद फरहाज़

बीती सदी में नब्बे के दशक के अंत में जब भारत और पाकिस्तान अपने अपने परमाणु अभियानों क्रमश: “शक्ति” और “गौरी” की आँच से तप रहे थे तो ग़ालिब के दो सदी बाद मनाये जाने वाले जयंती समारोह “अंदाज-ए.बयां” की मार्फत मशहूर पाक शायर मरहूम अहमद फराज़ साब द्वारा पढ़ी गयी निम्नलिखित कविता प्रकाश में आयी थी।

गुजरे कई मौसम, कई रातें बदलीं
उदास तुम भी हो यारों उदास हम भी हैं
फक़त तुम्ही को नहीं रंज-ए-चाक-दामानी
सच तो ये है कि दारीदाने-लिबास हम भी हैं…

तुम्हे भी जिद है कि मश्के-सितम रहे जारी
हमें भी नाज़ कि ज़ोरो-जफ़ा के आदी हैं

तुम्हे भी जाम कि महाभारत लड़ी तुमने
हमें भी नाज़ कि कर्बला के आदी हैं।

ना खिल सके किसी जानिब मोहब्बतों के पड़ाव
ना शाखे अमन लिये कोई फाख्ता आयी…

तो अब ये हाल है दरिंदगी के सबब
तुम्हारे पाँव सलामत रहे ना हाथ मेरे

ना जीत तुम्हारी ना कोई हार मेरी
ना साथ तुम्हारे कोई ना कोई साथ मेरे…

तुम्हारे देस में आया हूँ दोस्तों अब के
ना साज़ो-नग्मों की महफिल ना शायरी के लिये

अगर तुम्हारी आना ही का सवाल है तो
चलो मैं हाथ बढ़ाता हूँ दोस्ती के लिये।

{Dove Talkअहमद फराज़}

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भारतीय शायर मरहूम अली सरदार जाफ़री साब द्वारा अहमद फराज़ साब के कलाम के जवाब में पढ़ी गयी कविता यहाँ पढ़ें।

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