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अप्रैल 8, 2013

मिटाने वाले …गजल (हंसराज ‘रहबर’)

ज़ख्म हंस हंस के उठाने वाले
फन है जीने का सिखाने वाले
आज जब हिचकी अचानक आई
आ गये याद भुलाने वाले

बात को तूल दिए जाते हैं
झूठ का जाल बिछाने वाले
रहनुमा जितने मिले जो भी मिले
हाथ पर सरसों उगाने वाले

लो चले नींद की गोली देकर
वो जो आये थे जगाने वाले
वे जो मासूम नज़र आते हैं
आग भुस में हैं लगाने वाले

सांच को आंच नहीं है ‘रहबर’
मिल गये हमको मिटाने वाले|

हंसराज ‘रहबर’

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