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दिसम्बर 16, 2013

प्रेम यदि है प्रेम तो फिर…

प्रेम यदि है नाम silsila-001

जीवन के सर्वाधिक उजले रूप का

तो फिर,

लदी क्यों है मन पर

संशयों की टोकरी?

प्रेम यदि है पावनता

है यदि प्रेम,

एक निश्छल सरलता

तो चक्र क्यों हैं, संशयों के?

प्रेम यदि है पूर्णता

प्रेम यदि है प्रेम

तो फिर,

भंवर क्यों हैं, उलझनों के?

Yugalsign1

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