Posts tagged ‘Sansaar’

जून 28, 2013

यह अधिकार तुम्हारा ही है…

अनुभव की मंडी में जाकर

सबसे ऊँचा दाम लगाकर

जिसे खरीद लिया है मैंने

यह अधिकार तुम्हारा ही है…

जो सूरज डूबा करता है

थका थका ऊबा करता है

उसको सुबह मना लाते हो

यह उपकार तुम्हारा ही है

यह अधिकार तुम्हारा ही है…

कलाकार ने चित्र बनाकार

अमर बनाया तुम्हे धरा पर

अब तुम उससे रंग छीन लो

हक सौ बार तुम्हारा ही है

यह अधिकार तुम्हारा ही है…

अपना ही गम किससे कम है

ऊपर से तेरा भी गम है

मुझे चुकानी होगी कीमत

यह अधिभार तुम्हारा ही है

यह अधिकार तुम्हारा ही है…

{कृष्ण बिहारी}

मई 21, 2013

मेरे गीत नहीं पाओगे

गीतों में ही रहा करोगे

शब्द-शब्द में बहा करोगे

मुझे तलाशोगे उनमें तुम

फिर भी मीत नहीं पाओगे

मेरे गीत नहीं पाओगे…

तुमसे मैंने कब कुछ माँगा

फिर क्यों तोड़ दिया यह धागा

खोज खोज कर थक जाओगे

ऐसी प्रीत नहीं पाओगे

मेरे गीत नहीं पाओगे…

तुम्हे एक संसार मिला है

और बहुत-सा प्यार मिला है

फिर भी ज़रा सोच कर देखो

यह मनमीत नहीं पाओगे

मेरे गीत नहीं पाओगे…

भीतर-बाहर कितना रो लो

या फिर पारा-पारा हो लो

साँसों ने जो तुम्हे सुनाया

वह संगीत नहीं पाओगे

मेरे गीत नहीं पाओगे…

{कृष्ण बिहारी}

%d bloggers like this: