Posts tagged ‘Sahara’

मई 27, 2016

जल-हल

जल में हल
हल का जल,
जल ही जीवन
जीवन का हल,
हल का फल
फल का रस,
रस ही सार
सार ही धार,
धार का धौरा
धौरा में जल,
जल की माया
माया में काया,
काया बिन न कुछ पाया
पाया है तो आगे चल,
चल तू , जन गण तक
तक ना, थक ना,
ना थक चलता जा
जा पायेगा जल का हल,
हल का जल
जल सबका जल,
जल ही जीवन
जीवन का हल |
जल की धारा
धारा का जल,
जल है प्यारा
प्यारा है सहारा,
सहारा टूटा
टूटा जीवन,
जीवन खाली
खाली खेत,
खेत में उडती
उडती सूखी रेत,
रेत बिन पानी
पानी बिन सूना,
सूना जीवन
जीवन जिजिविषा,
जिजिविषा जिलाए
जिलाए किसान,

किसान का अन्न
अन्न की रोटी,
रोटी का जल
जल सबका जल,
जल ही जीवन
जीवन का हल

(रमेश चंद शर्मा  – गाँधी शांति प्रतिष्ठान) – स्वराज अभियान के जल-हल आंदोलन के संदर्भ में रची कविता!

नवम्बर 28, 2013

तुमने मुझे पुकारा जब था…

आँचल दांतों में दबाकर suhasini-002

पलकें थोड़ी सी झुकाकर

तुमने मुझे निहारा जब था,

धरती सारी घूम गई थी

आखें, आँखें चूम गई थीं…

कंघी बालों में चलाकर

साँसें कंधे पर टिकाकर

तुमने दिया सहारा जब था,

किस्मत मेरी झूम गई थी

आखें, आँखें चूम गई थीं…

खुद को दुल्हन सा सजा कर

साथी मन ही मन लजाकर

तुमने मुझे पुकारा जब था,

आखें, आँखें चूम गई थीं

आखें, आँखें चूम गई थीं…

(कृष्ण बिहारी)

 

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