Posts tagged ‘Saath’

जनवरी 17, 2014

आंसू…

बहुत बड़ी सी भीड़ थी

दोनों पार्श्व में

मंत्रोच्चार करती, जय-जयकार करती!

कान्हा के सामने बैठे थे,

हम तीन

माँ, पिताजी और मैं|

आह्लाद नहीं था

कि कहीं हो रहा था

ईश्वर से मेरा संयोग

वरन,

मैं जार-जार रोया था

सिर्फ इस खुशी को जीकर

कि, आज इस क्षण में

मैं शांत होकर

बैठ सका हूँ

इन् दोनों के साथ

और कि,

कहीं तो ईश्वर मुझ पर मुस्कराया है|

Yugalsign1

दिसम्बर 2, 2013

अब ये पौधा हरा न होगा

ये राज ही रहा मेरे लिए किkabl-001

कैसे,

आखिर कैसे

तुम जान जाती थी

कि मैंने साहस जुटा लिया है

तुमसे प्रणय निवेदन का

दिल की बातें कहने का,

सैकड़ों बार की कोशिश के बाद

जब जब मैंने हिम्मत की कि कह दूँ

‘मुझे तुमसे प्यार है’

तुम ने आग भर ली अपनी दृष्टि में मेरे लिए

वे  सारे निशान जो कहते थे तुम्ही मेरी मंजिल हो

अपने हाथों मिटा दिए तुमने

कैसे  जान गई थीं तुम कि

मैंने स्वीकार कर लिया है

कि तुम मेरे लिए क्षितिज का सूर्य हो

मैं पा नहीं सकता तुम्हे

और तब जब मैं हार मानने वाला ही था

तुमने  आँखों में प्यार भर

हंस कर बस ठीक तभी तुम ने कह दिया था

“तुम कितने प्यारे हो! मुझे तुम्हारा साथ बहुत पसंद है”

कैसे आखिर कैसे जान जाती थी तुम?

जब आज तुम मेरी नहीं

तुम को पाने की कोई आशा नहीं

सच कहूँ तो अब कोई हसरत भी नहीं

क्यूँ तुम ने ये कह दिया

“तुमने कभी कहा होता”!!

कैसे आखिर कैसे आज फिर तुम ने ये जान लिया

कि अब इस  पौधे की जड़े मर चुकी हैं

अब ये हरा नहीं होगा

Rajnish sign

नवम्बर 26, 2013

कुछ देर पुकार…चला जाऊँगा

किसने क्या कहाsilsila-001

किसने क्या सुना

तुमने ये किया

मैंने वो नहीं किया

तुम ऐसी ही हो

तुम वैसे ही हो

तुम ये हो

तुम वो हो

आज भी ये सवाल सुलझाने में

बाकी सब सिरे उलझ जाते हैं

कुछ हो न हो हम में

प्यार तो शर्तिया नहीं रहा कभी

प्यार शायद कुछ और होता होगा

जो मैंने किया…

नहीं किया…

पता नहीं…

तुमने किया…

नहीं किया…

पता नहीं…

सब कुछ ऐसे ही होना था शायद

ऐसे नहीं होना था तो फिर कैसे होना था?

और अगर ऐसे नहीं होना था

तो फिर ऐसे हुआ ही क्यूँ?

इसलिए तुम परेशान न होना मेरे लिए कभी

खुद को इलज़ाम भी न देना कोई

मेरा क्या है?

मैं चंद आवाजें और दूंगा

फिर चला जाऊंगा…

तुम्हारी इसी गली में

जहाँ मेरा चाँद उगा करता था

ये तन्हाई की रात भी गुज़ारूंगा

और निकल जाऊँगा|

आवारा भटकते हुए आ निकला था

या

यहीं आना था

तुम ले आयीं हाथ पकड़

या

मैं आया खुद

मालूम नहीं|

कहते हैं नज़रें हसीं होती है…

मैं भी कुछ लाया था

क्या लाया था…

मालूम नहीं…

हां आज भी कुछ है मेरी आँखों में

कुछ है मगर कोई शिकवा

कोई  शिकायत तो नहीं

मैं आवारा बेहिस बादल की तरह

थोडा सा बरसूँगा…

चला जाऊंगा…

तुम परेशान न होना कभी मेरे लिए….

ज़िन्दगी के सफ़र में सौ मोड़ आयें चाहे

किसी भी मोड़ पे तुम को अहसास-ऐ-तन्हाई न मिले

हर मोड़ पे किसी का साथ रहे

आज के बाद से हर तन्हा रात मेरी

मैं किसी भी तरह गुज़रता चला जाऊंगा

तुम परेशान न होना कभी मेरे लिए

खुद को इलज़ाम भी न देना कोई

मेरा क्या है…

कुछ देर पुकारूँगा…

चला जाऊँगा…

Rajnish sign

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