Posts tagged ‘Rain’

मार्च 22, 2013

बताओ तो, क्या गुलाब नग्न है? : पाब्लो नेरुदा

मुझे बताओ,

क्या गुलाब नग्न है?

या कि उसकी वेशभूषा ही ऐसी है?

वृक्ष क्यों छिपाते हैं,

अपनी जड़ों की भव्यता को?

कौन सुनता है दुखडा?

चोरी हो चुके वाहन का|

क्या दुनिया में कोई भी दुखी होगा,

बरसात में खड़ी रेल से ज्यादा ?

(पाब्लो नेरुदा)

Advertisements
जुलाई 22, 2011

मौसम

रिमझिम मौसम में
हरी दूब पर
नंगे पाँव चलाना सुहाता है,
बे-एतबार फुहारों में
अक्सर खिलते हैं
रिश्तों के मासूम फूल,
सर्द रूत जमाने लगती है
गुलाबों की पंखडियों पर ओस,
बर्फ होते दिलों के
अजनबी बनते एहसास
बेरुखी के लिहाफ में
करवटें बदल कर सो जाते हैं।

बल खाती नदियों की जवानी
सोख लेती हैं बेदर्द गर्मियां,
जज़्बात की जलन में
चिता होते देखे रेश्मी आँचल
और चौड़े-चकले फौलादी सीने,
संबंधों के सूखे तीरों के बीच
समय का चिरस्थाई समुद्र
बचा रह जाता है.
सूनी आँख से रिसता
मौसमों के बदलाव में।

(रफत आलम)

%d bloggers like this: