Posts tagged ‘Poetry’

जुलाई 30, 2011

बाज की चोंच में ब्रह्मांड

मैं खुश होते-होते रुक जाता हूँ
मैं प्यार करते-करते डर जाता हूँ
मैं कवितायें लिखते-लिखते
गद्य की तरफ मुड़ जाता हूँ
मुझे रह-रहकर आ जाती है याद
कि एक बाज की चोंच से छूट
ब्रह्मांड जायेगा फूट
फिर क्या होंगी मेरी खुशियाँ
क्या होगा मेरा प्यार
क्या होंगी ये कवितायें
जिन्हे मैं
लिख रहा हूँ।

(बद्रीनारायण)

जुलाई 2, 2010

कविता क्या है : कृष्ण बिहारी

सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री कृष्ण बिहारी ने पिछले चार दशकों में यूँ तो साहित्य की हर विधा में लिखा परन्तु उनकी ख्याति एक कहानीकार के रुप में ज्यादा हो गयी है। वैसे तो वे अपनी साहित्यिक यात्रा के प्रारम्भ से ही कविता भी लिखते रहे हैं परन्तु वे स्वयं कहते हैं,” और लोगों की बात तो छोड़ ही दीजिये घर परिवार के लोग जानते नहीं और यार दोस्त मानते नहीं कि मेरे अंदर मूलतः एक कवि ह्रदय धड़कता है “। यह हाल तो तब है जबकि उनकी कवितायें कादम्बनी और सारिका जैसी स्तरीय पत्रिकाओं में छपती रही थीं।

वे कविता और गीत लिखते भी रहे हैं और गाहे बेगाहे मंच से काव्यगान भी करते रहे हैं, गज़ल भी उन्होने कही हैं।

वे कहते हैं मेरी कविताओं में बनावट नहीं है। और कविताओं में जो है वह जीवन जीने से ही ऊपजा है।

कुछ देखा… कुछ सुना ….और कुछ भोगा हुआ सत्य, उनके अनुसार उनकी कविताओं में है।

वे अपनी काव्य रचनात्मकता समर्पित करते हैं

उन पलों को जिन्होने मेरी कविताओं को जमीन दी“।

कविता क्या है, जैसे प्रश्न जब कृष्ण बिहारी जी के किशोर मन को मथने लगे थे, तब भी ऐसे प्रश्न उनके अंदर से काव्य के रुप में ही बाहर आते थे। किशोरावस्था के दिनों में रची गयी, कविता की जांच पड़ताल करने वाली,  एक छोटी सी कविता यहाँ प्रस्तुत है।

क्या है कविता?
बच्चे का जन्म…
जीवन संघर्ष…
ईश्वर के अलावा रची गयी आदमी की दुनिया…
एक खूबसूरत लड़की जो पड़ोस में रहती है…
एक नौकरी की तलाश…
जो एक बेकार नौजवान की छ्टपटाहट है…
एक लड़के-लड़की की मोहब्बत का नाम है कविता…
दर्द की अभिव्यक्ति कविता है…

किसी शाख पर फूल का खिलना कविता है…
सूरज की पहली किरन कविता है…
या किसी डाल से फूल का गिरना
या कि डूबते सूरज की लाली…
कविता क्या है ?

आगे से कृष्ण बिहारी जी के काव्य रुपी खजाने से निकली रचनायें निरंतर यहाँ अवतरित होती रहेंगी।

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