Posts tagged ‘Phool’

सितम्बर 26, 2016

अभी कई बातें …(Sándor Weöres)

sandorअभी तो कहने को कई बातें शेष हैं,

घटनाएं जिन्हें हमने जिया,

बातें जो हमने सीखीं,

वस्तुएं जिन्हें हमने देखा,

और मुलाकातें जो कई बार हुईं

और वे जो हुईं सिर्फ एक बार,

हर फूल इंतजार कर कर रहा है अपना जिक्र किये जाने का,

हर मुट्ठी भर धूल इस लायक है कि उस पर ध्यान दिया जाए,

मगर जब इन पर कुछ कहने का मौक़ा आएगा इनमें से सिर्फ एक,

और उस एक के भी कुछ टुकड़े समा पायेंगें कहने में,

जहां तक स्मृतियों का सवाल है मनुष्य करोड़पति होता है,

मगर जब उन्हें कलमबद्ध करने का वक्त्त आता है तो

वह पाता है खुद को कंगाल,

लगभग हर चीज किताब के बाहर छूट जाती है,

और अंदर रह जाते हैं चंद टुकड़े और स्वप्न|

(Sándor Weöres, हंगेरियन कवि)

प्रस्तुति – साभार विनोद शर्मा

 

Advertisements
जून 14, 2013

तन्हाई में रो दोगे तुम

बेमौसम जब फूल खिले थे

इन्द्रधनुष के रंग मिले थे

तभी लगा था बहुत जल्द ही

इक दिन मुझको खो दोगे तुम

तन्हाई में रो दोगे तुम…

सुनो अकेले मत होना तुम

बोझ अकेले मत ढोना तुम

मित्र! न ऐसा कर पाए तो

बाग बबूल का बो दोगे तुम

तन्हाई में रो दोगे तुम…

तुमने जो उपहार दे दिया

लेने से इनकार कब किया

मैं सब कुछ स्वीकार करूँगा

मुझे खुशी से जो दोगे तुम

तन्हाई में रो दोगे तुम…

सूख नदी का जल जाएगा

औ’ सागर भी घट जाएगा

खुशबू से जो नाम लिख दिया

उसको कैसे धो दोगे तुम

तन्हाई में रो दोगे तुम…

{कृष्ण बिहारी}

सितम्बर 17, 2011

टूटे दिल का कौन मसीहा

कली का दिल फटा
पुष्प महका

बांस का दिल छिदा
बाँसुरी बना

सीप का दिल कटा
मोती जन्मा

आदमी का दिल टूटा
क्या हुआ?

न सुगंध,
न सुर,
न मोल,
एक अनाम दर्द
वह भी लापता

दरक गई धड़कनों के,
न स्वप्न,
न वास्तविकता,
तोड़ दिए गए दिल का,
कोई नहीं मसीहा

(रफत आलम)

%d bloggers like this: