Posts tagged ‘Pattiyan’

दिसम्बर 3, 2013

बंद का समय

सूखी पत्तियों की फिसलन भरी डगर के पारblueumb-002

हरियाली के आँचल में

झुरमुटों के पास से

शाम का धुआँ निकल रहा है

कोई माँ, खाना बना रही है

छौनों के घर लौटने का समय हो गया है|

सड़क के किनारे बनीं छोटी-छोटी फड़ें

बाहर सजा सामान अब समेटा जा रहा है

मैले से सफ़ेद कुर्ते-पाजामे में

कैद छुटा बच्चा

पिता को सामान पकड़ा रहा है

दुकान को बंद करने का समय हो गया है|

Yugalsign1

नवम्बर 29, 2013

अधेड़ ज़िंदगी अब भी हरी है

मेरी शाखों पर बेले लटक चुकीं mantree-001

मेरे तने पर काईयों की परत

सात ऊपर फ़ैली टहनियाँ

और

कगार को धसकती जमीन पर जमी जड़ें

पर

मेरी टहनियाँ अब भी हरी हैं

एकटक आसमान देखती हुई

कौन जाने

कौन सा इसका टुकड़ा हमारा है?

Yugalsign1

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