Posts tagged ‘Pagalpan’

जनवरी 6, 2014

यक्ष प्रश्न

यक्ष प्रश्न हैwomanleavingman-001

क्या पागलपन है?

क्यूँ पागलपन है?

यक्ष प्रश्न है…

उत्तर क्या दें?

उत्तर कैसे दें?

उत्तर किसे दें?

अब न तो शब्द बचे हैं

न जुबां रही है

किस भाषा को वो समझेगा?

अब जुबां क्या बदलेगी हमारी?

न उसका दिल बदलेगा…

प्रश्न बहुत हैं …

उत्तर कम हैं

कम क्या ?

कुछ के उत्तर ग़ुम हैं

जाओ दिल पे बोझ न लादो

अपने मन को मत अपराधो

आज से बस तुम इतना जानो

दोष तुम्हारा तनिक नहीं है

अपना दिल तो है ही पागल

उम्र के साथ नहीं चल पाया

अब तक बचपन में जीता है

टूटे चूड़ी के टुकड़ों को

सिरे गला कर फिर सीता है

दुनियादारी नहीं समझता…

तुमसे आगे नहीं देखता

तुम न होती तब भी इसका

हर हाल में होना ये था

पागल था…पागल है

पागल होना था…

सयानों के साए में इसका

दम घुटता है…

Rajnish sign

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नवम्बर 18, 2013

दो रूहें हों नीम अँधेरा हो…

नाम देना ज़रूरी है क्या?ruhdark-001

हर रिश्ते को नाम देना

-क्या पागलपन है!

कुछ ऐसा क्यूँ नहीं कि

बस दो रूहें हों

नीम अँधेरा  हो

ख़ामोशी हो

मौन कहे

और

मौन सुने

हानि  लाभ

नफा नुकसान

इज्ज़त बेईज्ज़ती

शंका आशंका

भूत भविष्य

क्या पाओगे

क्या मिलेगा

क्यों कर रहे हो

क्या कर रहे हो

क्या मिलेगा

दूरी नजदीकी

जिम्मेदारियां

मजबूरियां

हालात

क्यों ऐसा नहीं हुआ

क्यों वैसा नहीं हुआ…

इन तमाम प्रश्नों के पार भी कुछ हो सकता है

और

इन सब के पार जो कुछ भी होगा

बहुत पाक होगा

बहुत निश्छल होगा

(रजनीश)

फ़रवरी 22, 2013

ये दर्द जो तुमने दे दिया है

ये दर्द तुमने जो दे दिया है

इसे में उम्र भर ढो तो पाऊं

तो देखना क्या कहेगी दुनिया

क़यामत तक तो रहेगी दुनिया |

मेरे मन को सूना पाकर

पहले तुमने डेरा डाला

फिर छोड़ा, यों नाता तोड़ डाला

टूट गई सपनों की माला|

ये शून्य तुमने जो दे दिया है

इसी को पूरा जो कर दिखाऊं

तो देखना क्या कहेगी दुनिया

अंगारों में ही दहेगी दुनिया |

देवालय का देव बताकर

तुमने ही पत्थर कह डाला

जिसको चाहा मधुरित माना

उसको ही पतझर कह डाला |

यही अगर हो मेरी हकीकत

कसम तुम्हारी, जो मान जाऊं

तो देखना क्या कहेगी दुनिया

अभी तो कल तक रहेगी दुनिया |

शायद यह मन का पागलपन

जो तुम में ही रमा हुआ है

लेकिन इसको ज्ञात नहीं है

किसका कब चन्द्रमा हुआ है |

ये गीत जो तुमने दे दिया है

इसको जन्म-भर यदि  गुनगुनाऊं

तो देखना क्या कहेगी दुनिया

ये पीर कैसे सहेगी दुनिया |

{कृष्ण बिहारी}

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