Posts tagged ‘Paanv’

जनवरी 1, 2015

नए साल की शुभकामनाएँ!

खेतों की मेड़ों पर धूल भरे पाँव को
कुहरे में लिपटे उस छोटे से गाँव को
नए साल की शुभकामनाएं!

जाँते के गीतों को बैलों की चाल को
करघे को कोल्हू को मछुओं के जाल को
नए साल की शुभकामनाएँ!

इस पकती रोटी को बच्चों के शोर को
चौंके की गुनगुन को चूल्हे की भोर को
नए साल की शुभकामनाएँ!

वीराने जंगल को तारों को रात को
ठंडी दो बंदूकों में घर की बात को
नए साल की शुभकामनाएँ!

इस चलती आँधी में हर बिखरे बाल को
सिगरेट की लाशों पर फूलों से ख़याल को
नए साल की शुभकामनाएँ!

कोट के गुलाब और जूड़े के फूल को
हर नन्ही याद को हर छोटी भूल को
नए साल की शुभकामनाएँ!

उनको जिनने चुन-चुनकर ग्रीटिंग कार्ड लिखे
उनको जो अपने गमले में चुपचाप दिखे
नए साल की शुभकामनाएँ!

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

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मार्च 4, 2014

तुझसे मुलाक़ात के बाद…

रात, कल रात बहुत तपी…silentlove-001

तुझसे उस मुलाक़ात के बाद!

भीतर मेरी  साँसों से निकल कर कहीं…

तेरी सदा आती  रही

दिल के नज़दीक कहीं…

तेरे सीने की नर्म छुअन गुदगुदाती रही

इक लहर सी उठती रही पाँव से सर तलक जैसे

मेरे सीने से होकर तेरी हर सांस जाती रही

जाने क्या जादू है तेरी आवाज़ में

जो न कैसा मेरे बदन में तूफ़ान उठा देती है…

बेचैन कर देता है…

मेरे बिस्तर कि सलवटें कह देंगी

कि रात भर मुझे किस की  याद आती रही

हर बूँद लहू में घुल कर

किस तरह तू मुझे सहलाती रही

Rajnish sign

दिसम्बर 17, 2013

ज़िंदगी…रूमानी हसरतों का पलना

ज़िन्दगी…Dk-001

कुछ तल्ख़ हकीक़तें

कुछ नर्म खयालात

गर्म रेत पे नंगे पाँव चलने जैसा

बादलों पे तैरना जैसे कभी

रूमानी हसरतों का पलना

परवान चढ़ना

किसी के होने का अहसास

कंधे पे सर रखना

गुलाबी ख्वाब बुनना

उगते डूबते दिन लिखना

चांदनी रात भर तपना

जेठ दुपहरी का गलना

ज़िन्दगी…

मिलना किसी का

ज़िन्दगी…

न रखना खुद को जिंदा

ज़िन्दगी…

ढूंढना ख़ुशी किसी के चेहरे में

रहना डूबे कभी उदासी में

ज़िन्दगी…

आह! ज़िंदगी…

Rajnish sign

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