Posts tagged ‘Paanee’

मई 2, 2016

पानी पानी …(रघुवीर सहाय)

Raghuvir Sahayपानी पानी
बच्चा बच्चा
हिन्दुस्तानी
मांग रहा है
पानी पानी
जिसको पानी नहीं मिला है
वह धरती आजाद नहीं
उस पर हिन्दुस्तानी बसते हैं
पर वह आबाद नहीं
पानी पानी बच्चा बच्चा
मांग रहा है
हिन्दुस्तानी
जो पानी के मालिक हैं
भारत पर उनका कब्जा है
जहां न दें पानी वहां सूखा
जहां दें वहां सब्जा है
अपना पानी
मांग रहा है
हिन्दुस्तानी
बरसों पानी को तरसाया
जीवन से लाचार किया
बरसों जनता की गंगा पर
तुमने अत्याचार किया
हमको अक्षर नहीं दिया है
हमको पानी नहीं दिया
पानी नहीं दिया तो समझो
हमको बानी नहीं दिया
अपना पानी
अपनी बानी हिन्दुस्तानी
बच्चा बच्चा मांग रहा है
धरती के अंदर का पानी
हमको बाहर लाने दो
अपनी धरती अपना पानी
अपनी रोटी खाने दो
पानी पानी
पानी पानी
बच्चा बच्चा
मांग रहा है
अपनी बानी
पानी पानी

पानी पानी
पानी पानी
[‘हँसो हँसो जल्दी हँसो’ (1978)]

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दिसम्बर 18, 2014

जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है

सुना है जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है !
सुना है शेर का जब पेट भर जाये
तो वो हमला नही करता ,
दरख्तों की घनी छाओँ जा कर लेट जाता है !
सुना है जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है !!
सुना है जब किसी नदी के पानी में
हवा के तेज़ झोंके जब दरख्तों को हिलाते हैं
तो मैना अपने घर को भूल कर
कौवे के अंडो को परों से थाम लेती है |
सुना है घोंसले से कोई बच्चा गिर पड़े तो ,
सारा जंगल जाग जाता है |
सुना है जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है !!
सुना है जब किसी नद्दी के पानी में
बये के घोंसले का गुन्दुमी साया लरज़ता है |
तो नदी की रुपहली मछलियाँ उसको
पडोसी मान लेती हैं |
नदी में बाढ़ आ जाये ,
कोई पुल टूट जाये तो ,
किसी लकड़ी के तख्ते पर
गिलहरी, सांप ,बकरी और चीता
साथ होते हैं |
सुना है जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है !!
ख़ुदा-वंदा , जलील-ओ -मोतबर , दाना-ओ-बीना
मुंसिफ-ओ-अकबर
मेरे इस शहर में
अब जंगलों ही का कोई क़ानून नाफ़िस कर
कोई दस्तूर नाफ़िस कर |
सुना है जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है !!

(ज़ेहरा निगाह)

जून 3, 2014

मृग मरीचिका

मृग मरीचिका…dreamwo-001

बस नज़र की हद के आगे ही…

बस यहीं मिलेगा जीवन

लेकिन…

प्यासे को मरना…

जल बिन…

जल के प्यासे को…

प्रेम बिन…

प्रेम पिपासु को…

Rajnish sign

मई 14, 2014

आयुर्वेदिक दोहे

ayurvedaजहाँ कहीं भी आपको,काँटा कोइ लग जाय।
दूधी पीस लगाइये, काँटा बाहर आय।।

मिश्री कत्था तनिक सा,चूसें मुँह में डाल।
मुँह में छाले हों अगर,दूर होंय तत्काल।।

पौदीना औ इलायची, लीजै दो-दो ग्राम।
खायें उसे उबाल कर, उल्टी से आराम।।

छिलका लेंय इलायची,दो या तीन ग्राम।
सिर दर्द मुँह सूजना, लगा होय आराम।।

अण्डी पत्ता वृंत पर, चुना तनिक मिलाय।
बार-बार तिल पर घिसे,तिल बाहर आ जाय।।

गाजर का रस पीजिये, आवश्कतानुसार।
सभी जगह उपलब्ध यह,दूर करे अतिसार।।

खट्टा दामिड़ रस, दही,गाजर शाक पकाय।
दूर करेगा अर्श को,जो भी इसको खाय।।

रस अनार की कली का,नाक बूँद दो डाल।
खून बहे जो नाक से, बंद होय तत्काल।।

भून मुनक्का शुद्ध घी,सैंधा नमक मिलाय।
चक्कर आना बंद हों,जो भी इसको खाय।।

मूली की शाखों का रस,ले निकाल सौ ग्राम।
तीन बार दिन में पियें, पथरी से आराम।।

दो चम्मच रस प्याज की,मिश्री सँग पी जाय।
पथरी केवल बीस दिन,में गल बाहर जाय।।

आधा कप अंगूर रस, केसर जरा मिलाय।
पथरी से आराम हो, रोगी प्रतिदिन खाय।।

सदा करेला रस पिये,सुबहा हो औ शाम।
दो चम्मच की मात्रा, पथरी से आराम।।

एक डेढ़ अनुपात कप, पालक रस चौलाइ।
चीनी सँग लें बीस दिन,पथरी दे न दिखाइ।।

खीरे का रस लीजिये,कुछ दिन तीस ग्राम।
लगातार सेवन करें, पथरी से आराम।।

बैगन भुर्ता बीज बिन,पन्द्रह दिन गर खाय।
गल-गल करके आपकी,पथरी बाहर आय।।

लेकर कुलथी दाल को,पतली मगर बनाय।
इसको नियमित खाय तो,पथरी बाहर आय।।

दामिड़(अनार) छिलका सुखाकर,पीसे चूर बनाय।
सुबह-शाम जल डाल कम, पी मुँह बदबू जाय।।

चूना घी और शहद को, ले सम भाग मिलाय।
बिच्छू को विष दूर हो, इसको यदि लगाय।।

गरम नीर को कीजिये, उसमें शहद मिलाय।
तीन बार दिन लीजिये, तो जुकाम मिट जाय।।

अदरक रस मधु(शहद) भाग सम, करें अगर उपयोग।
दूर आपसे होयगा, कफ औ खाँसी रोग।।

ताजे तुलसी-पत्र का, पीजे रस दस ग्राम।
पेट दर्द से पायँगे, कुछ पल का आराम।।

बहुत सहज उपचार है, यदि आग जल जाय।
मींगी पीस कपास की, फौरन जले लगाय।।

रुई जलाकर भस्म कर, वहाँ करें भुरकाव।
जल्दी ही आराम हो, होय जहाँ पर घाव।।

नीम-पत्र के चूर्ण मैं, अजवायन इक ग्राम।
गुण संग पीजै पेट के, कीड़ों से आराम।।

दो-दो चम्मच शहद औ, रस ले नीम का पात।
रोग पीलिया दूर हो, उठे पिये जो प्रात।।

मिश्री के संग पीजिये, रस ये पत्ते नीम।
पेंचिश के ये रोग में, काम न कोई हकीम।।

हरड बहेडा आँवला चौथी नीम गिलोय,
पंचम जीरा डालकर सुमिरन काया होय॥

दही मथें माखन मिले, केसर संग मिलाय,
होठों पर लेपित करें, रंग गुलाबी आय..

बहती यदि जो नाक हो, बहुत बुरा हो हाल,
यूकेलिप्टिस तेल लें, सूंघें डाल रुमाल..

अजवाइन को पीसिये, गाढ़ा लेप लगाय,
चर्म रोग सब दूर हो, तन कंचन बन जाय..

अजवाइन को पीस लें , नीबू संग मिलाय,
फोड़ा-फुंसी दूर हों, सभी बला टल जाय…

अजवाइन-गुड़ खाइए, तभी बने कुछ काम,
पित्त रोग में लाभ हो, पायेंगे आराम..

ठण्ड लगे जब आपको, सर्दी से बेहाल,
नीबू मधु के साथ में, अदरक पियें उबाल…

अदरक का रस लीजिए. मधु लेवें समभाग,
नियमित सेवन जब करें, सर्दी जाए भाग..

रोटी मक्के की भली, खा लें यदि भरपूर,
बेहतर लीवर आपका, टी० बी० भी हो दूर…

गाजर रस संग आँवला, बीस औ चालिस ग्राम,
रक्तचाप ह्रदय सही, पायें सब आराम..

शहद आंवला जूस हो, मिश्री सब दस ग्राम,
बीस ग्राम घी साथ में, यौवन स्थिर काम…

चिंतित होता क्यों भला, देख बुढ़ापा रोय,
चौलाई पालक भली, यौवन स्थिर होय..

लाल टमाटर लीजिए, खीरा सहित सनेह,
जूस करेला साथ हो, दूर रहे मधुमेह…

प्रातः संध्या पीजिए, खाली पेट सनेह,
जामुन-गुठली पीसिये, नहीं रहे मधुमेह..

सात पत्र लें नीम के, खाली पेट चबाय,
दूर करे मधुमेह को, सब कुछ मन को भाय…

सात फूल ले लीजिए, सुन्दर सदाबहार,
दूर करे मधुमेह को, जीवन में हो प्यार…

तुलसीदल दस लीजिए, उठकर प्रातःकाल,
सेहत सुधरे आपकी, तन-मन मालामाल…

थोड़ा सा गुड़ लीजिए, दूर रहें सब रोग,
अधिक कभी मत खाइए, चाहे मोहनभोग…

अजवाइन और हींग लें, लहसुन तेल पकाय,
मालिश जोड़ों की करें, दर्द दूर हो जाय…

ऐलोवेरा-आँवला, करे खून में वृद्धि,
उदर व्याधियाँ दूर हों, जीवन में हो सिद्धि…

दस्त अगर आने लगें, चिंतित दीखे माथ,
दालचीनि का पाउडर, लें पानी के साथ…

मुँह में बदबू हो अगर, दालचीनि मुख डाल,
बने सुगन्धित मुख, महक, दूर होय तत्काल..

कंचन काया को कभी, पित्त अगर दे कष्ट,
घृतकुमारि संग आँवला, करे उसे भी नष्ट…

बीस मिली रस आँवला, पांच ग्राम मधु संग,
सुबह शाम में चाटिये, बढ़े ज्योति सब दंग..

बीस मिली रस आँवला, हल्दी हो एक ग्राम,
सर्दी कफ तकलीफ में, फ़ौरन हो आराम…

नीबू बेसन जल शहद , मिश्रित लेप लगाय,
चेहरा सुन्दर तब बने, बेहतर यही उपाय..

मधु का सेवन जो करे, सुख पावेगा सोय, कंठ
सुरीला साथ में , वाणी मधुरिम होय…

पीता थोड़ी छाछ जो, भोजन करके रोज,
नहीं जरूरत वैद्य की, चेहरे पर हो ओज..

ठण्ड अगर लग जाय जो नहीं बने कुछ काम,
नियमित पी लें गुनगुना, पानी दे आराम…

कफ से पीड़ित हो अगर, खाँसी बहुत सताय,
अजवाइन की भाप लें, कफ तब बाहर आय..

अजवाइन लें छाछ संग, मात्रा पाँच गिराम,
कीट पेट के नष्ट हों, जल्दी हो आराम…

छाछ हींग सेंधा नमक, दूर करे सब रोग,
जीरा उसमें डालकर, पियें सदा यह भोग

जनवरी 22, 2014

सर्दी के सफ़ेद बादल और रक्तिम लौ

सर्दी में बादल fireplace-001

पुकार लगाते तो हैं

पर बहुधा बिन पानी चले आते हैं

आते हैं

तो हर चीज को सफेदी से ढक देते हैं

चारों ओर ऐसा प्रतीत होता है

जैसे धुंध ने घर कर लिया हो

शामें धुंधला जाती हैं

मेरे कमरे में अंधियारा बढ़ जाता है

मैं गमन कर जाता हूँ

बीते काल में –

मोमबत्ती के हल्के प्रकाश से

भरे कमरे में!

जब आतिशदान में लकडियाँ जलती हैं

तो कभी भी बोल नहीं पाता हूँ

बस खो जाता हूँ

आग की लपटों से बनती बिगड़ती आकृतियों में|

तुम्हारी त्वचा का गोरापन ओढ़ने लगता है

हल्का लाल-गुलाबी रंग

जब तपन की गहन तरंगें

और लालसा घेर लेती है

तुम्हारा खूबसूरत चेहरा

दमकने लगता है ऐसे

जैसे तालाब से कमल खिलकर निकलना शुरू करने लगता है

जिस्मानी  उतार चढ़ाव

चमकने लगते हैं

और एक गर्म एहसास चारों ओर बहने लगता है

और तुम्हे और मुझे अपने पंखों में समेट लेता है

सब कुछ उड़ने लगता है

ऐसे जैसे सब कुछ बादल ही हो गया है

कमरे में निस्तारित होने लगता है

श्वेत धीरे-धीरे लाल में

ऐसा लगने लगता है

हमारे जिस्म पिघल जायेंगे

मोमबत्ती की लौ

मोटी हो और तेजी से जलने लगती है

बादल रक्तिम लाल हो जाते हैं

और मुझे प्रतीत होता है

कि सर्दी के बादल लाल तप्त हो गये हैं

और वास्तव में

वे बिन पानी के ही हैं!

Yugalsign1

दिसम्बर 23, 2013

शीशे से पत्थर तोड़ते ‘अरविन्द केजरीवाल’ और ‘आप’

arvind kejriwal-001पत्थर से शीशा तोडना तो रोजमर्रा की बात है, पर बात तो तभी जमती है जब कोई शीशे से पत्थर को तोड़कर उसे तराश कर दिखाए|

अरविन्द केजरीवाल‘ और उनके दल ‘आप‘ ने विगत में यह करिश्मा करके दिखाया जब उन्होंने पारदर्शी तरीके से चन्दा जुटाया और 20 करोड़ रुपयों में 70 सीटों पर चुनाव लड़कर 28 सीटें जीतीं, जबकि ऐसा कहा जाता है कि जमे जमाये दल एक विधायक की सीट के लिए भी करोड़ो रूपये खर्च कर देते हैं और यह तो सर्वविदित है ही कि पिछले साढ़े छः दशकों में किसी भी दल ने कभी भी अपने को मिले धन के बारे में पारदर्शिता नहीं दिखाई और कोई नहीं जानता कहाँ से उन्हें सैंकडों करोड़ रूपये मिलते रहे हैं| ‘आप‘ ने भारतीय राजनीति को स्वच्छ बनाने की ओर एक कदम उठा दिया है और अब जनता के हाथ में है कि वह बाकी दलों को भी मजबूर करे कि वे अपने आर्थिक स्रोतों का खुलासा करें और अपनी चन्दा व्यवस्था को पारदर्शी बनाएँ| वरना तो सभी को पता है कि जो धन कुबेर उन्हें करोड़ों दे रहे हैं वे उन्हें मुफ्त में धन नहीं देते रहे और उनकी अपेक्षायें चुनाव में जीतने के बाद उनकी आर्थिक कृपादृष्टि से लाभ पाए दल पूरा करते रहे होंगे| यह विशुद्ध लेन देन वाला व्यापार रहा है| इसी लेन देन की भारतीय राजनीतिक अर्थशास्त्र की प्रक्रिया ने भारत की तरक्की को असमानता वाला बनाया है क्योंकि धन कुबेरों ने कोई धर्मखाता तो खोल नहीं रखा है| राजनीतिक दलों ने ऐसे ही निर्णय लिए होंगे जिससे धन का लाभ लेने वाले दल उन्ही प्रोजेक्टों को पास करते रहे हैं जिससे उन्हें धन देने वाले कुबेरों का लाभ होता रहे| काले धन की बुनियाद पर खड़ी राजनीतिक व्यवस्था ने भारतीय समाज को आकंठ भ्रष्टाचार के दलदल में धकेल दिया है|

दूसरी बार पत्थर को शीशे से ‘आप‘ ने तोड़ा जब उसने यह सिद्ध करके दिखा दिया कि बड़े दलों की जातीय, साम्प्रदायिक और तमाम तरह के भेदों वाली राजनीति से परे जाकर चुनाव लड़ा और जीता जा सकता है| ‘आप‘ के उम्मीदवारों की न मतदाताओं ने जाति देखी, न क्षेत्रीयता और न ही उनका संप्रदाय|

तीसरी बार शीशे से पत्थर को तोड़ने और तराशने का काम ‘आप‘ ने तब किया जब भाजपा और कांग्रेस ने जाल बिछाकर ‘आप‘ को बदनाम करना चाहा कि वे लोगों से झूठे वादे करके चुनाव में इतनी सीटें जीते हैं और अब सरकार न बना कर अपनी खाल बचाना चाहते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि वे अपने वादे पूरे नहीं कर पायेंगे|

कर्मठ और ईमानदार आदमी अगर बुद्धिमान भी हो तो भविष्य में बसे संभावित परिणामों में से सबसे बेहतर को हाथ बढ़ा अपने लिए पकड़ लेता है| ताजे दिमाग की भांति ‘आप‘ ने कांग्रेस और भाजपा दोनों को बैकफुट पर भेज दिया सरकार बनाने के लिए दिल्ली की जनता की राय जानने के लिए लोगों से दुबारा समपर्क स्थापित करके| यह बुद्धिमत्ता भरा पूर्ण कदम था जिसने कांग्रेस को थोड़ा कम (क्योंकि उसकी तो केवल आठ ही  सीटें आयी हैं), पर भाजपा को बौखलाहट के स्तर तक दहका दिया और कल तक ‘आप’ को रोज चुनौती दे रही भाजपा के सुर ही बदल गये| वे सीधे सीधे ‘आप‘ पर किस्म किस्म के उलजलूल आरोप मढने लगे|

अब जबकि यह तय हो गया है कि ‘अरविन्द केजरीवालदिल्ली के अगले मुख्यमंत्री बन रहे हैं, भाजपा के नीचे से राजनीतिक जमीन खिसक गयी है| उसकी सरकार किसी भी हालत में नहीं बन पा रही थी| ‘आप‘ द्वारा रचे गये नैतिक माहौल के कारण वह ‘आप‘ के नवनिर्वाचित विधायकों को तोड़ने का प्रयास करती भी नहीं दिखना चाहती थी और कांग्रेस और ‘आप’ दोनों में से कोई भी दल उसे समर्थन दे नहीं सकता था| उसकी हालत देख पुरानी कहावत “खिसयानी बिल्ली खम्बा नोचे” चिरतार्थ होती दिखाई दे रही है| भाजपा के नेता ‘आप‘ के बारे में केवल तीन चार दिन पहले दिए गये बयानों से उलट वाणी बोल उस पर आक्रमण कर रहे हैं|

यह ‘आप‘ की राजनीति की ही सूक्ष्म कला है कि ‘आप‘ एकदम स्पष्ट शब्दों में बोल रही है कि उसने कांग्रेस से समर्थन नहीं लिया है और कांग्रेस उसकी  या वह कांग्रेस की सहायक पार्टी नहीं है| वह अपनी 28 सीटों के बलबूते सरकार बनाने जा रही है और बिलकुल मुमकिन है कि विधानसभा में पहले ही दिन ‘आप‘ की सरकार विश्वास मत हासिल न कर पाए| वैसे ऐसा लगता नहीं है कि समर्थन की घोषणा करके कांग्रेस पहले ही दिन सरकार गिराने की बदनामी अपने सिर लेना चाहेगी| पूंजीपतियों की नीतियों के हितों की परवाह कर करके कांग्रेस और भाजपा को इस बात की उत्सुकता भी है कैसे ‘आप‘ उन वादों को पूरा कर सकती है जो उसने अपने 70 घोषणापत्रों में किये थे|

सरकार बनाने के बाद ‘आप‘ का अगला कारनामा होगा दिल्ली में बिजली की दरों के मामले में दिल्ली वासियों को बड़ी राहत देना| ‘आप‘ ने भली भांति अध्ययन करके ही इतनी बड़ी घोषणा की है और इस बात में कोई संदेह नहीं होना चाहिए आगामी दिनों में दिल्लीवासियों को बिजली के मामले में एक बड़ी राहत मिलने वाली है और देश में पहली बार कोई ऐसा मुख्यमंत्री सत्ताधीन होगा जो केवल मुनाफे के लिए जोड़तोड़ करने वाली कंपनियों की हाँ में हाँ नहीं मिलाएगा| ‘अरविन्द केजरीवाल‘ के लिए ऐसा कर पाना मुमकिन होगा क्योंकि उन्होंने किसी कम्पनी से धन लेकर चुनाव नहीं लड़ा है और उन पर किसी किस्म का दबाव नहीं है कि वे जनता के हितों को कंपनियों के आलीशान दफ्तरों में गिरवी रख दें|

रोजाना ‘700 लीटर‘ पानी इस्तेमाल करने वाले परिवार को ‘जलमित्र‘ घोषित करना निस्संदेह बेहद बुद्धिमानी का कदम होगा| 701 और उससे ऊपर पानी की मात्रा इस्तेमाल करने वाले परिवार पूरे पानी का धन देंगे और जब वे देखेंगे कि उनसे केवल 1-2 लीटर काम पानी इस्तेमाल करने वाला परिवार मुफ्त में पानी का उपयोग कर पा रहा है तो उसमें अपने आप चेतना आयेगी कि वह भी 700 लीटर पानी में ही गुजारा करे| शुरू में इस कदम के आलोचक इसका अर्थ भले ही न समझ पायें पर अगर यह योजना चल निकली तो एक साल के आंकडें जल सरंक्षण और जल वितरण की दिशा में काम करने वाले लोगों के लिए आँखें खोलने वाले सिद्ध हो सकते हैं| जो छोटे परिवार रोजाना 300-400 लीटर पानी से ही गुजारा करते रहे हैं वे इस योजना के सीधे लाभार्थी होंगे| यहाँ यह जिक्र करना निरर्थक न होगा कि भाजपा और कांग्रेस, जिन्होने ‘आप‘ का घोषणापत्र गहराई से पढ़ने की जहमत नहीं उठाई है और सतही तौर पर पढ़ कर इसकी आलोचना करते रहे हैं, पानी वाले मुद्दे पर ‘आप‘ की खिल्ली उड़ाकर दरअसल अपने को ही हास्यास्पद स्थिति में पहुंचा चुके हैं| अगर उन्होंने ढंग से पानी वाला मुद्दा पढ़ा होता तो ‘आप‘ की खिल्ली उड़ाने के बारे में सोचते भी नहीं|

दिल्ली पुलिस को जेड प्लस सुरक्षा व्यवस्था लेने से इनकार करके ‘अरविन्द केजरीवाल‘ ने एक नई परिपाटी की शुरुआत की है| छुटभैये नेता भी इसी जुगाड में लगे रहते हैं कि उन्हें एक दो सरकारी गनर मिल जाएँ जिससे कि वे अपने रुतबे को समाज में दिखा सकें और बाबा रामदेव जैसे अतिमहत्वाकांक्षी योग गुरु और दवा व्यापारी ने तो जेड प्लस सुरक्षा लेने के लिए जी तोड कोशिश की थी| यही हाल भाजपा के प्रधानमंत्री पड़ के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का है जिनके लिए जेड प्लस सुरक्षा लेने के लिए भाजपा ने जमीन आसमान एक कर दिया था| जहां सड़क दुर्घटनाएं आम हों और राजनीतिक विरोधियों को आसानी से ठिकाने लगा दिया जाता रहा हो वहाँ सुरक्षा लेने से इनकार करके ‘अरविन्द केजरीवाल‘ ने खतरा उठाया है पर सत्य यह भी है कि अगर गांधी जिंदा होते, सुभाष बोस जिंदा होते या भगत सिंह जिंदा होते और देश के नेता होते तो वे भी कभी सुरक्षा के नाम पर जनता से दूरी न बनाते|

यह भी आज का बहुत बड़ा सत्य है जनता का वह तबका जिसका जमीर राजनीतिक दलों के यहाँ बंधक नहीं है, मौजूदा राजनीतिक माहौल से इस कदर उकता चुका है कि अगर ‘अरविन्द केजरीवाल‘ जैसी नई आशा को खरोंच भी आती है तो पूरा विश्व इस बात का गवाह बन सकता है कि जब आम जनता का गुस्सा फूटता है तो बड़े बड़े तख़्त हिल जाते हैं और बाद एबदे सूरमा धराशायी हो जाते हैं| ‘अरविन्द केजरीवाल‘ की सुरक्षा की जिम्मेदारी अब हर राजनीतिक दल की है क्योंकि अरविन्द केजरीवाल को कुछ भी होने की अवस्था में नुकसान राजनीतिक दलों का ही होना है| हो सकता है बहुत से दलों का राजनीतिक अस्तित्व ही समाप्त हो जाए और उन्हें हमेशा के लिए निर्वासन पर जाना पड़ जाए|

अरविन्द केजरीवाल‘ का यह कदम वी.आई.पी संस्कृति से बुरी तरह से ग्रसित और दूषित दिल्ली के सामाजिक और राजनीतिक के सुधार की ओर एक बड़ा कदम है| और उनका और उनके मंत्रियों और विधायकों की साधारण जीवन शैली आने वाले दिनों में राजसी जीवन जीने के आदि हो चुके नेताओं के लिए खतरे का सबब बनने वाली है| |

अरविन्द केजरीवाल‘ को अभी बहुत से पत्थरों को शीशे से तोड़ कर तराश कर उन्हें खूबसूरत बुतों का आकार प्रदान करना है|  पर ईमानदारी, सच्चाई का साथ और हौसला उन्हें कामयाबी दिलाएगा बड़े से बड़े मुकाम पाने में|

जान हथेली पर रख निडर होकर आगे बढ़ने वाले सूरमाओं के लिए ही कहा गया है :-

हयाते- जाविदां आई है जां-बाजों के हिस्से में

हमेशा जीने वाले है ये जितने मरने वाले हैं

जून 1, 2013

थोड़ी और पिला दो भाई

इतना ज्यादा भरा हुआ हूँ

लगता है मैं मरा हुआ हूँ

कोशिश करके धनवन्तरी से

तुम मुझको दिखला दो भाई !

थोड़ी और पिला दो भाई!

अगर इसे मैं पी जाउंगा

शायद मैं कुछ जी जाउंगा

जीवन की अंतिम साँसों को

कुछ तो और जिला दो भाई!

थोड़ी और पिला दो भाई!

खामोशी का टुकड़ा बनकर

एक उदासी बसी है भीतर

सोई हुई झील के जल को

पत्थर मार हिला दो भाई!

थोड़ी और पिला दो भाई!

मांग रहा हूँ मैं आशा से

देह और मन की भाषा से

अमृत की गागर से मुझको

एक तो घूँट पिला दो भाई!

थोड़ी और पिला दो भाई!

मुझे छोड़ जो चला गया है

खुद से ही वह छला गया है

है तो मेरा जानी दुश्मन

पर इक बार मिला दो भाई!

थोड़ी और पिला दो भाई!

{कृष्ण बिहारी}

अक्टूबर 13, 2011

मुक्त हो अर्थहीन काया

कभी आँखों से गिरे होंगे अश्रु
पानी की बहती बूंदे थाम लेने के वास्ते
तब, एक रेशमी आँचल था।

आसान था धूप का सफर भी
घनेरी जुल्फ के साये में
जिंदगी सुस्ता लेती थी।

फिर चल पड़ता था आशाओं का कारवां
मरीचिकाएं भी उन दिनो
मंजिलों के निशान हुआ करती थीं
हर प्यास का इलाज थे
अमृत भरे होठ किसी के।

समय के घने कोहरे पीछे
छिप गए सायों का ज़िक्र ही क्या?
खुद अपना अस्तित्व तक
बेबसी के अँधकार के पास गिरवी है
ना राह, ना सफर, ना मंजिल की आरजू
बस सोचता है शून्य सा दिमाग
किसी तरह साँसों का क़र्ज़ कटे
किसी तरह हाड-माँस की केद से
मुक्त हो अर्थहीन काया

(रफत आलम)

मई 24, 2011

चींटियाँ

देखता हूँ चीटियों को
पग तले आकर कुचले जाते
या किसी बेख्याल पान की पीक में
दबते हुए।

अकाल मृत्यु का सत्य
सबके साथ है
यूँ भी चंद घड़ी का होता है
इनका जीवन।

देखता हूँ चीटियों को
अपनी नियति से बेपरवाह
सूक्ष्म खाद्य कण मुँह में दबाये
बिलों की और भाग रही हैं।

लगता तो यही है
कर्म ही इनकी जाति, धर्म और नस्ल हैं
शायद यही जीवन का अर्थ भी।

ये नन्ही चीटियाँ
दिल-ओ-जान से
उस घर को बसाने की फिक्र में है
जो चंद बूँद पानी
एक मुट्ठी माटी से नष्ट हो सकता है।

मुझे भी घर की फिक्र बहुत है
नीची जात वालों को
पानी नहीं पिलाता अपने बर्तन में
किरायेदार नहीं रखता किसी विधर्मी को
रगं-रोगन और मरम्मत भी
करा लेता हूँ दफ्तर के बेगारियों से
घूस से दो नयी मंजिलें चढ़ा ली हैं
आशियाने पर।

मैं ढीठ मानव ठहरा
कब ग्लानि करता हूँ
अपने कर्मों पर
जो कार्यकुशलता नहीं
चाटुकारी की बुनियाद पर खड़े हैं।

कब ग्लानि करता हूँ
हैसियत पर
जो अंधेर नगरी में
दरबारी के सिवा क्या है।

कब ग्लानि करता हूँ
पदवियों पर
जो भ्रष्ट वजीरों के प्रति
अंधनिष्ठा का इनाम भर हैं
ये निष्ठा हर नई सरकार के साथ
बदल जाती है।

किसी ने सही तो कहा था मुझे कठपुतली
खुद के अस्तित्व का ठिकाना नहीं
चीटियों के ज़रूर ’पर’ लगा देता हूँ।

(रफत आलम)

मई 19, 2011

पानी मयस्सर नहीं, और कहीं जाम छलकते हैं

कारीगरों के हिस्से में इनाम आ गये
हम औजारों का क्या था काम आ गए

वो खेल तो शाहों की शह-मात का था
मजबूर प्यादे बेगार में काम आ गए

प्रजा को बेच रहे हैं ज़मीर-फरोश शाह
ये कैसा दौर है कैसे निज़ाम आ गए

सियाहकारों के गुनाहों के चश्मदीद थे
मुल्जिमों की फ़ेहरिस्त में नाम आ गए

साकी तेरे मयकदे का खुदा ही हाफिज
कमज़र्फ रिन्दों के हाथों जाम आ गए

बस्तियों में तो पीने का पानी भी नहीं
नेता के वास्ते छलकते जाम आ गए

अंधेरनगरी में अवाम ने चुने थे शाह
मालायें ले के चाटुकार तमाम आ गए

हम अपना पता भूले हुए थे ए आलम
गनीमत जानिये घर सरे शाम आ गए

(रफत आलम)

ज़मीर्फारोश -अंतरात्मा विक्रेता,
निजाम -सत्ता,
सियाहकारों – काले कार्य करने वाले (बेईमान ),
फेहरिस्त -सूची,
चश्मदीद – प्रत्यक्षदर्शी,
रिंद – शराबी

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