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मई 17, 2010

पानी पर चलने की कला: कितना सच कितना झूठ

भारत में तो सैंकड़ो किस्म की बातें तरह तरह के चमत्कारों के बारे में फैली रहती हैं।  सदियों से पानी पर चलने की संभावना के बारे में बातें चलती रही हैं और कुछ लोग ऐसा दावा भी करते रहे हैं कि वे पानी पर चल सकते हैं। कुछ दिन पूर्व ऐसी खबर भी समाचार पत्रों में छपी थी कि एक सज्जन पानी में एक घंटे के आसपास या उससे भी ज्यादा पदमासन और कुछ अन्य योगासनों की मुद्रा में बैठे रह सकते हैं और वे पानी की सतह पर बैठे या लेटे रहने की क्षमता को बढ़ाने की और निरंतर प्रयासरत हैं।

बहरहाल नीचे दिये वीडियो में पानी पर चलने की कला को एक नये खेल की तरह लिया गया है। क्या इस वीडियो में शामिल लोग किसी ट्रिक का इस्तेमाल कर रहे हैं या वे वाकई पानी की सतह पर कुछ कदम दौड़ पा रहे हैं, खुद ही देखकर फैसला करें।

यहाँ अस्सी के दशक में रमेश सिप्पी द्वारा बनायी गयी फिल्म शान के एक गाने की याद आती है जहाँ अमिताभ बच्चन, शशि कपूर और उनके साथी साधुओं के वेश धर कर जनता को ठगते हैं यह दावा करके कि वे पानी पर चल सकते हैं।  इस कामेडी गीत को यहाँ देखा जा सकता है।

मनुष्यों में सबसे ऊपर की सीढ़ी पर पहुँच चुके बुद्ध पुरुषों ने कभी चमत्कारों पर ज्यादा जोर नहीं दिया है। एक घटना का विवरण याद आता है शायद यह राम कृष्ण परमहंस के जीवन से सम्बंधित है। एक व्यक्ति उनके पास आया और बोला कि उसने पच्चीस सालों की कड़ी मेहनत से पानी पर चलने की योग्यता हासिल कर ली है और वह चल कर नदी के उस पार जा सकता है।

परमहंस बोले कि क्यों उसने जीवन के कीमती पच्चीस साल ऐसी विद्या सीखने में बेकार कर दिये जिसका मानव जीवन में ऊँचाईयाँ पाने से कोई सम्बंध नहीं है। कोई भी नाव वाला केवल पच्चीस पैसे में तुम्हे अपनी नौका में बैठाकर नदी पार करा सकता है। इतना ध्यान यदि खुद को जानने पहचानने में लगाया होता तो क्या न हो जाता।

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