Posts tagged ‘Naqab’

दिसम्बर 19, 2013

चश्म मीठे पानी का रेगिस्तानी सफ़र में आएगा

रात भर नज़र में सपने भीगते रहे desert-001
हर आती जाती सांस में तुम थे
खुश थे हम

के…

इंतज़ार मक़ाम पायेगा…
जिसके अरमां में नींदें कुर्बान की
वो रुख बा-नकाब सही…

आएगा,
नज़र झुकाए शरमाया शरमाया सा
ज़ुल्फ़ चेहरे पे गिराए हुए आएगा
अल-सुबह से दिल में सुकून सा था
हर आहट ने कहा “लो आ गए वो”
थक गए तो मेरे ही कन्धों पे सो गए
तारे तमाम रात मेरे साथ जागे थे
आ भी जा के यकीन हो चले…
इंतज़ार के बाद सही
एक चश्म मीठे पानी का

रेगिस्तान के इस सफ़र में आएगा

Rajnish sign

मई 11, 2011

हुस्नेमुजस्सम

खुशबू कहाँ हूँ मैं जो गुलाब छू लूँ
चाह थी पलकों से तेरे ख्वाब छू लूँ

जिंदगी सकून देने का वादा तो कर
तौबा मेरी जो फिर जामेशराब छू लूँ

बिन पढ़े ही सीख जाऊँ सबके इश्क
आँखों से जो हुस्न की किताब छू लूँ

इश्क की आग में शमा पर जलता हूँ
पतंगा बोला चाहूँ तो अफताब छू लूँ

तुम्हारी याद के सहारे नींद आ जाए
ख्वाब में आओ तुम तो ख्वाब छू लूँ

सहरा की दरियादिली भी परखी जाए
प्यास की जिद है आज सराब छू लूँ

किस्मत में काँटों की चुभन लिखी है
दिल फिर भी चाहता है गुलाब छू लूँ

कौन देख सका हुस्नेमुजस्सम आलम
मेरी कहाँ है मजाल जो नकाब छू लूँ

(रफत आलम)

अफताब                   – सूर्य,
सहरा                       – मरुस्थल,
सराब                       – मरीचिका,
हुस्नेमुजस्सम         – साक्षातसौंदर्य (ईश्वर)

%d bloggers like this: