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फ़रवरी 21, 2017

अमृता शेरगिल के चित्र को देख कर …

amritashergil1अंधी रात का तुम्हारा तन :

दाहिने हाथ की उठी हथेली ;

नग्न कच्चे कुचों –

कटी के मध्य देश- –

लौह की जाँघों से

आंतरिक अरुणोदय की झलक मारता है

ओ चित्र में अंकित युवती:

तुम सुंदर हो!

मौन खड़ी भी तुम विद्रोही शक्ति हो!

(केदारनाथ अग्रवाल – ०९ अक्टूबर १९६०)

 

दिसम्बर 24, 2014

नग्न हो भी मारा गया

मैंने शेरवानी और पाज़मा पहिना तो पत्नी बोली
वे तुम्हें मुसलमान समझ कर मार डालेंगे
मैंने धोती कुर्ता पहिना तो पत्नी बोली
वे तुम्हें हिन्दू समझ कर मार डालेंगे
मैंने सिर पर पगड़ी बाँधी तो भी वह बोली
वे तुम्हें सिख समझ कर मार डालेंगे
मुझे लगा कि ये जो कपड़े हैं
उसी के कारण सारे झगड़े हैं
इसलिए मैं सारे कपड़े उतार कर नंगा घूमने लगा
और उन्होंने मुझे जैन मुनि समझ कर मार डाला

(वीरेंद्र जैन)

मार्च 22, 2013

बताओ तो, क्या गुलाब नग्न है? : पाब्लो नेरुदा

मुझे बताओ,

क्या गुलाब नग्न है?

या कि उसकी वेशभूषा ही ऐसी है?

वृक्ष क्यों छिपाते हैं,

अपनी जड़ों की भव्यता को?

कौन सुनता है दुखडा?

चोरी हो चुके वाहन का|

क्या दुनिया में कोई भी दुखी होगा,

बरसात में खड़ी रेल से ज्यादा ?

(पाब्लो नेरुदा)

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