Posts tagged ‘Mirrage’

मई 23, 2010

मन के फरेब

सच कुछ भी हो
पर मन माने तब ना।

वह तो विचार ढूँढे रखता है
अपने आप को बहला कर रखने के लिये।

अपने मुताबिक शब्दों की खुराक से
मन का पेट तो भर जाता है
पर वक़्त की कसौटी पर
ऐसे बहलाव
ऐसे छलावे
खतरनाक ही साबित होते हैं।

पर मन की ये खूबी कि
वह तमाम तरह की खुद ही की
असफलताओं, गलतियों को
यूँ संभालता है कि
जानते हुए भी कि ये सब झूठ है
व्यक्ति उन्हे सच मान बैठता है !

…[राकेश]

Advertisements
%d bloggers like this: