Posts tagged ‘Mein’

जून 4, 2014

अलगाव : सब जान लें इसके बारे में

बजरिये  इश्तेहार womanleavingman-001
ये एलान किया जाता है
अब “हम”,
“मैं” और “वो” हो गए हैं
मेरे और उन के
अलहदा अलहदा
आधे आधे वज़ूद
आवारा फिर रहे हैं
खासो आम को हिदायत है
हमारे बाकी आधे तलाश न करे
जुदाई के तिराहे पे
नये बाज़ार खड़े हो गए हैं
पीछे के रास्ते में बबूल के जंगल उग आये  हैं
Rajnish sign
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मई 15, 2014

रिश्ता क्या कहलाये?

रिश्ते क्यूँ परिभाषित करें हम?lovers-001

बोलो?

क्या कोई बिना नाम का रिश्ता नहीं हो सकता हमारे बीच?

कमिटमेंट के दस्तावेजों की कोई ज़रुरत है क्या?

क्या इतना नाकाफी है जानना

कि मैं पूरा पूरा तुम्हारा हुआ…

तुम में हुआ…

दिल से

रूह से

जिस्म से!

Rajnish sign

नवम्बर 21, 2013

जो चाहे करो कातिल मेरे

रात अंगारों पे बीती कल की मेरीmanrain-001

तुम को तो नींद आई होगी…

जलते देखा है किसी को तुमने ओस की बूंदों  से?

कल मुझे देखा होता…

बहुत देर भीगा बाहर लेकिन

तुम्हारी रेशमी तपन से बहुत देर तक जला बदन

रात ने एक पल को भी पलकें नहीं मूँदी

जागती पडी रही बिस्तर पे मेरे

कम न हुयी फिर भी  सीने की जलन

कल अगर सीने से तुम लगती

तो ख़त्म हो जाते मैं और तुम, हम में

या तो अब पास आ जाओ तुम मेरे

या कुछ बुलाने का सामान करो

मसीहा मान लिया है अपना

खुद अपने कातिल को मैंने

अब मर्जी पे तुम्हारी है

जो जी में आये करो मेरा…

(रजनीश)

नवम्बर 11, 2013

बाहों के घेरे में बचूँगा क्या?

रख दो अपने आरक्त लबों कोtitan-001

मेरे चिर प्यासे लबों पे

सुलगते जिस्म को पिघला दो

समेट के अपनी बाँहों में

बरस जाओ मेरे तन मन पे

जैसे

कोई आवारा बादल बरस जाता है

युगों से तपते सहरा पे

बदल दो इसे एक छोटे हरे टुकड़े में

न रहने दो खुद को ‘खुद’,

न मुझे ‘मैं’ रहने दो

शायद तुझ में मिल के

मुझे ‘मैं ‘ मिल जाऊं…

सोचता हूँ कि मैं रहूँगा क्या

जब तेरी बाहें मेरे गिर्द होंगीं…

(रजनीश)

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