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मई 21, 2013

मेरे गीत नहीं पाओगे

गीतों में ही रहा करोगे

शब्द-शब्द में बहा करोगे

मुझे तलाशोगे उनमें तुम

फिर भी मीत नहीं पाओगे

मेरे गीत नहीं पाओगे…

तुमसे मैंने कब कुछ माँगा

फिर क्यों तोड़ दिया यह धागा

खोज खोज कर थक जाओगे

ऐसी प्रीत नहीं पाओगे

मेरे गीत नहीं पाओगे…

तुम्हे एक संसार मिला है

और बहुत-सा प्यार मिला है

फिर भी ज़रा सोच कर देखो

यह मनमीत नहीं पाओगे

मेरे गीत नहीं पाओगे…

भीतर-बाहर कितना रो लो

या फिर पारा-पारा हो लो

साँसों ने जो तुम्हे सुनाया

वह संगीत नहीं पाओगे

मेरे गीत नहीं पाओगे…

{कृष्ण बिहारी}

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