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अप्रैल 29, 2013

आंसू एक न गिरने दूंगा…

चाहे घड़ी विदा की आये

दुनिया ठुकुरसुहाती गाये

मेरा धैर्य नहीं टूटेगा

मैं खुद को न ढहने दूंगा

आंसू एक न बहने दूंगा…

युगों युगों से रोज संजोया

अंतर्मन ने खूब भिगोया

फिर भी कसम यही खाई है

मैं इनको न बहने दूंगा

आंसू एक न बहने दूंगा…

दुनिया ने खेती की धन की

मेरी धरती यही नयन की

इसमें फसल उगाई है

जो वह न सबको चरने दूंगा

आंसू एक न बहने दूंगा…

मुझे जरुरत नहीं दया की

मुझमे मूरत है ममता की

तुम जो चाहो हाथ धरो

तो यह न तुमको करने दूंगा

आंसू एक न बहने दूंगा…

{कृष्ण बिहारी}

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