Posts tagged ‘Lokpal.’

अप्रैल 23, 2015

अरविन्द केजरीवाल के नाम खुला पत्र : (योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण का पार्टी से निष्काषन)

श्री अरविन्द केजरीवाल, संयोजक (आम आदमी पार्टी) के नाम खुला पत् र:

आम आदमी पार्टी की अनुशासन समिति द्वारा चार प्रमुख सदस्यों प्रशांत, योगेन्द्र, आनन्द कुमारअजित झा को पार्टी से निष्कासित किये जाने के फैसले की हम {परमजीतसिंह (सचिव) व राजीव गोदारा (मुख्य प्रवक्ता) आम आदमी पार्टी}, घोर निंदा करते हैं व इस फैसले को आप के मूल सिद्धांत स्वराज के खिलाफ मानते हैं |

जिस अनुशासन समिति का गठन 29 मार्च को किया गया उसी समिति ने प्रशांत भूषण, योगेन्द्र यादव, आनन्द कुमारअजीत झा को कारण बताओ नोटिस जारी कर 48 घंटे मेंजवाब मांगा | प्रशांत, योगेन्द्र व आनन्द कुमार ने विस्तृत जवाब दिए जबकि अजीत झा ने नोटिस भेजने वालीअनुशासन समिति को असैंवधानिक करार देते हुए जवाब नहीं दिया |

प्रशांत व योगेन्द्र ने कारण बताओ नोटिस के अपने जवाब में समिति के दो सदस्यों पंकज गुप्ताआशीष खेतान से निवेदन किया था कि वे दोनों लोग पहले ही प्रशांत व योगेन्द्र के खिलाफ सार्वजनिक रूप से ब्यान देकर उन्हें पार्टी विरोधी करार दे चुके हैं, इस लिए इन दोनों को फैसला करने की प्रक्रिया से हट जाना चाहिए | कारण बताओ नोटिस में वही आरोप लगाए गए हैं जिन पर पंकज गुप्ताआशीष खेतान पहले ही फैसला दे चुके हैं |

जवाब दिए जाने के कुछ ही घंटों बाद “अनुशासनसमिति” ने रात को ही इन चारों नेताओं को पार्टी से निकालेजाने का फैसला ले लिया व इन नेताओं को भेजने से पहले ही मिडिया को भेज दिया गया | हमें उम्मीद थी पार्टी कि अनुशासन समिति अपने फैसले की प्रति को भी सार्वजानिक करेगी, जबकि फैसला व आरोप सार्वजानिक किये गए हैं | हमें आशा थी कि उस फैसले में निष्काषित किये गए नेताओं के जवाब पर विचार कर उसे संतोषजनक ना माने जाने के कारण बताये जायेंगें व साथ साबित हुए आरोपों बारे भी स्पष्टता होगी | मगर लम्बी इन्तजार के बाद भी फैसले की जानकारी नहीं मिल पाई है | यह भी नहीं कहा बताया गया कि कौन से आरोप साबित हुए |

हम निम्न कारणों के चलते इस फैसले का विरोध करतें है:

1) फैसले के सार्वजानिक नहीं होने से व निष्काषित लोगों को नहीं मिलने से यह साफ़ हो जाता है कि इन लोगों के जवाब को जांचा ही नहीं गया |

2) समिति के दो सदस्यों पंकज गुप्ता व आशीष खेतान दोनों ने प्रशांत व योगेन्द्र के खिलाफ न सिर्फ आरोप लगाए बल्कि नोटिस से पहले ही उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियाँ करने का दोषी करार दिया था | उन्हीं दो लोगों को जाँच समिति में रखा गया | पूर्वाग्रह के चलते इन्हें फैसले की प्रक्रिया से हट जाने के निवेदन के बाद भी स्वीकार नहीं किया गया | ना ही कोई कारण बताया गया कि ये दोनो लोग फैसले की प्रक्रिया से अलग क्यों नहीं हुए |

3) प्रशांत, योगेन्द्र व आनन्द कुमार के जवाब में दिए गए तथ्यों व जवाब की समीक्षा नहीं की गई |

4) प्रशांत जी के जवाब के साथ उनकी अध्यक्षता वाली अनुशासन समिति (जिसमें पंकज गुप्ता भी सदस्य थे) की कार्यवाही की मिनट्स भी भेजे गए | उससे जाहिर होता है कि जिन लोगों के खिलाफ अनुशासनहीनता की कार्यवाही चल रही थी उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाया गया था, मगर इन चार वरिष्ठ साथियों को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए नहीं बुलाया गया |

हम मानते हैं कि ऊपर दिए गए तथ्य चार नेताओं के निष्कासन की निंदा करने के लिए पर्याप्त कारण हैं | इस फैसले से न्याय के हर सिद्धांत को तिलांजली दी गई है | यह फैसला साफ़ करता है कि स्वराज व आंतरिक लोकतंत्र की आवाज उठाने वालों को इसी तरह से पार्टी से बाहर किया जाएगा |

मगर हम स्वराज व आन्तरिक लोकतंत्र के लिए स्वयं की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए “अनुशासन समिति” द्वारा प्रशांत, योगेन्द्र, आनन्द कुमार व अजीत झा को पार्टी से बहार किये जाने के फैसले की कड़ी निंदा करते हैं, साथ ही आगाह करना चाहते हैं कि पार्टी अपने स्वराज के रास्ते से भटक रही है | यदि समय रहते पार्टी का राष्ट्रिय नेतृत्व नहीं चेता तो जनता उसके अहंकार का जवाब देगी |

हम अंत में कहना कहते हैं कि प्रशांत भूषण ने जो मुद्दे अपने जवाब में उठाये हैं, उन की तुरंत जाँच करवाई जाये | साथ ही हमारी मांग है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान जिन दो उम्मीदवारों की टिकट लोकपाल के कहे पर बदली गई थी, उन टिकटों को दिए जाने की सिफारिस करने वालों के नाम सार्वजानिक किये जाएँ व उनके खिलाफ कार्रवाई की जाये | हम मांग करते हैं कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य नवीन जयहिंद के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों व आर्थिक अनियमितताओं सम्बन्धी मामले में लंबित जाँच, जिसमें हरियाणा के संयोजक से डिटेल रिपोर्ट भेजी जा चुकी है (प्रशांत जी के जवाब के साथ 16/10/2014 को हुई अनुशासन समिति की बैठक के फैसले का सलंगन दस्तावेज यह बताता हैं) को लोकपाल समिति के पास तुरंत भेजा जाए | साथ ही राजेश गर्ग (पूर्व विधायक) द्वारा जेटली के नाम से फोन करवाने के आरोपों के मामले की जाँच जल्द पूरी करने के लिए दिल्ली पुलिस को आग्रह किया जाये |

परमजीत सिंह (8950213717 ) राजीव गोदारा (9417150798)

सचिव मुख्य प्रवक्ता

आम आदमी पार्टी, हरियाणा आम आदमी पार्टी, हरियाणा

सितम्बर 3, 2011

भ्रष्टाचार: कुछ अनबुझे सवाल

एक किसान होकर मैं
पूछता हूँ कि,
बीज बोने से लेकर
फसल काटने तक
किसान, खेत मज़दूर जो
जीतोड़ मेहनत करके
अपनी फसल तैयार करके
मंडी में बेचने ले जाता है
और वहां कौड़ियों के भाव
अपनी फसल बेचने के बाद
खाली हाथ लौटकर
क़र्ज़ के बोझ तले
घुटन भरी जिंदगी जीने को मजबूर
आत्महत्या को विवश होता है,

और

किसान से खरीदी गयी
उसी फसल को
चौगुने दाम बेचने वाले’ दलालों’
और जो खुली बाज़ार व्यवस्था के नाम पर
किसान, मज़दूर के भाग्य से
खुलकर खेलतें हैं
उन मुनाफाखोरों से निबटने का
क्या लोकपाल के पास
कोई उपाय है?

जो किसान, खेत-मजदूर अन्न उगाए
वही पेट भर न खाए
व्यवस्था की इससे बड़ी नाकामी
और कोई है क्या?

यह केवल अन्याय ही नहीं
एक बड़ा अत्याचार भी है
जो रोटी पैदा करे
उसी से रोटी छीन ली जाए
और अन्न
बड़े बड़े ताले लगे गोदामों में
ज्यादा कीमतों के फेर में
भूखे गरीब का पेट भरने के बजाय
सड़, गल कर फैंक दिया जाए
तो ऐसे जमाखोरों से
निबटने के लिए
लोकपाल के पास
है कोई उपाय?

इसलिए
उस शहरी पढे लिखे मध्यम वर्ग
जिसने थाली में पड़ी
गोल रोटी तो देखी है
पर जिसे यह अहसास नहीं कि
इस रोटी के पीछे
किसान खेत मज़दूर की
कितनी पसीने की बूंदे बहीं हैं
भला सोचो वह क्योँ और
कितनी कशिश से
इसके विरुद्ध लड़ाई लड़ सकता है?

सबको रोटी कपड़ा
पैदा करने वाला किसान, खेत मज़दूर
जब तक पेटभर रोटी और
पूरा तन ढकने के लिए कपड़ा
तक भी न जुटा पाएगा
तब तक
भ्रष्टाचार के विरुद्ध
लड़ी जाने वाली कोई भी लड़ाई
इसलिए सफल न होगी

क्योंकि…

अत्याचार और अन्याय
किसी भी किस्म के
भ्रष्टाचार से बढकर होता है!

(अश्विनी रमेश)

अगस्त 17, 2011

हम खुद ही न मार डालें कहीं अन्ना को!


आजकल हालात के चलते
कई बार सोचने पर मजबूर हूँ
उस सच के बारे में
जिसे सब जानते है
पर बोलने को कोई तैयार नहीं-
यह कि सारे कुएँ में भ्रष्टाचार की भाँग पड़ी है।

मैं दस गुना फीस देकर
डाक्टर से इलाज करा रहा हूँ
उस पर तुर्रा यह
भगवान तुल्य वह बेशर्म डाक्टर
आपरेशन के अलग से मांगता है।

हम में कोई भी कम कहाँ है मित्रों!

बच्चों की आला स्कूल में भरती से लेकर
रेल टिकट तक के लिए
सब खुशी खुशी ऊपर से देते हैं
काले धन बल के बदले
मेघावी उम्मीदवारों को पीछे धकेल
अपनी कर्महीन संतानों के लिए
नौकरियाँ हथियाँ रहे हैं।

सारे कुएँ में भ्रष्टाचार की भांग पड़ी है।

इस बेईमान माहौल में
ये जो बूढा फकीर अन्ना बाबा
ईमान की भीख मांगता फिर रहा है
करनी के हम सब चोर
कथनी से उसे प्रोत्साहित करने वाले
शायद बेचारे को टूटा दिल मार देंगे।

कहो कौन है
अपने काले धन से अटे लॉकर खोलने वाला
बताओ कौन है
जो आगे आकर कहे
बाबा मुझसे पाप हुआ
देश के नाम लो ये
स्विस बैंक की चाबी।

सच तो यह है मित्रों!
सरापा बेईमान हो चुकी इस बस्ती में
ईमान की बात ही फ़िज़ूल है
फिर भी यदि अब भी कहीं
विवेक की चिंगारियाँ बाकी हैं
दुआ करो वे आग बने
काले धन के सर्वव्यापी इस कीचड़ में
ईमान के कंवल खिलें
हो सदा के लिए भ्रष्टाचार के तम का नाश
उजाला हो दिलो में, दिमागों में देश हित का
दुआ करो !प्रकाशित विकास मार्ग पर
कदम मिला कर सब चलें।

(रफत आलम)

%d bloggers like this: