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नवम्बर 28, 2013

तुमने मुझे पुकारा जब था…

आँचल दांतों में दबाकर suhasini-002

पलकें थोड़ी सी झुकाकर

तुमने मुझे निहारा जब था,

धरती सारी घूम गई थी

आखें, आँखें चूम गई थीं…

कंघी बालों में चलाकर

साँसें कंधे पर टिकाकर

तुमने दिया सहारा जब था,

किस्मत मेरी झूम गई थी

आखें, आँखें चूम गई थीं…

खुद को दुल्हन सा सजा कर

साथी मन ही मन लजाकर

तुमने मुझे पुकारा जब था,

आखें, आँखें चूम गई थीं

आखें, आँखें चूम गई थीं…

(कृष्ण बिहारी)

 

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