Posts tagged ‘Lachari’

जनवरी 14, 2014

दोपहर, साथ, नींद और पलायन

इस तरह तो न थे, हम-तुम! avishkar-001

दुश्वारियां जिंदगी की तो पता थीं

कल भी|

ये फिरकते वृत्त है रौशनी के

किनारियाँ अंधेरों की तो पता थीं

कल भी|

बुद्धू बुद्ध की नींद भी गहरी

लाचारियाँ असमंजसों की तो पता थीं

कल भी|

सयानेपन की तुम्हारे भी सीमाएं हैं

पारियां बचपने की मेरी तो पता थीं

कल भी|

निर्वात तोडता है देह का चुम्बक

सीढियां लम्बी समाधानों की तो पता थीं

कल भी|

रिश्ते हैं कई मेरे और तुम्हारे तईं

गारियाँ सर्द अबोलों की तो पता थीं

कल भी|

कई तो हैं संजोग, ऐसे-वैसे

कलाकारियाँ कायनात की तो पता थीं

कल भी|

सिर्फ बोलों के आईने में रिश्तों का सच

दीवारियाँ रंग-ऐ-नस्ल की तो पता थीं

कल भी|

अपने-अपने सुखों में चटख आए दुख

बीमारियाँ सुखों -दुखों की तो पता थीं

कल भी|

प्यार भरे वो तरंगित, शर्मीले स्पंदन

यारियाँ दिल से दिल की तो पता थीं

कल भी|

Yugalsign1

मार्च 21, 2013

तब तुम मुझको याद करोगे…

अभी तुम्हारा ध्यान कहीं है

पीड़ा का अनुमान नहीं है

जिस दिन ठोकर लग जायेगी

उस दिन तुम फ़रियाद करोगे

तब तुम मुझको याद करोगे…

बालू की दीवार खड़ा कर

ताशों के तुम महल बना कर

अपने दिल की इस बस्ती को

जिस दिन तुम खुद बर्बाद करोगे

तब तुम मुझको याद करोगे…

मैं संयम का नहीं पुजारी

लंगडी नैतिकता लाचारी

मुझ बैरागी का दुनिया में

अनुरागी जब नाम धरोगे

तब तुम मुझको याद करोगे…

देखो तुम्हे बता देता हूँ

मैं सबको अपना लेता हूँ

सच कहता हूँ रुक न सकूंगा

जिस दिन लंबी सांस भरोगे

तब तुम मुझको याद करोगे…

सीता राम रटा डाला है

पंखों पर भी ताला जड़ा है

पिंजरे के पंछी को आखिर

एक दिन तो आज़ाद करोगे

तब तुम मुझको याद करोगे…

{कृष्ण बिहारी}

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