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जनवरी 3, 2014

तुम आई थीं…इतना तो याद है मुझे

तुम आयीं थी पास मेरे…lovers-001
कल रात
याद  तुम्हे भी होगा इतना तो…
लब चूमे थे लबों से अपने
पलकों पे मोती बीने थे
पास खींच के गले लगाया
याद तुम्हे भी होगा…
इतना तो
आँखों के डोरों ने रंगत अपनी
लाल करी थी…
कुछ बात कही थी
दिल ने अपनी गति बढ़ाकर
हाथों को उकसाकर मेरे हाथ धरे थे
याद तुम्हे भी होगा…
इतना तो
तुमको याद तो होगा सब कुछ
लबों का मिलना…
साँसे बढ़ना
सीने का गिरना…
उठना
चुप रह कर के सब कुछ कहना
अपने मिलने की सीमा तक
रुकना, मिलना, चलना, बहना,
तुम को  क्या क्या और याद है?
मैं तो सब कुछ भूल गया था
तेरे आने से तेरे जाने तक
दिया बुझे से सहर हुए तक
रौशन मेरी रात रही बस
तिल तिल मेरा बदन जले तक
मुझको बस याद है इतना
मुझको तो बस याद है इतना…
तुम आई थीं!
Rajnish sign
मई 12, 2011

वह लड़की

बहुत मन करता है
उस लड़की से मिलने का
जिससे हुआ था पहली बार प्यार
मुझे।

सुनता हूँ
कोई कमी नहीं है उसके पास
गाड़ी-घोड़ा यानि कि कार-बँगला, नौकर-चाकर
अफसर पति और
खूबसूरत मेधावी दो बच्चे
मतलब यह कि वह सब कुछ
जो किसी सम्पन्न के पास
हो सकता है, होना चाहिये
वह सब कुछ उसके पास है।

शायद मेरे उन आसमानी वायदों से भी अधिक
जो मैंने उससे किये थे।
मेरे वायदे एक दिन में किये वायदे नहीं थे
धीरे-धीरे इकट्ठा होते गये थे।

मेरा प्यार
अचानक पहली दृष्टि में हुआ प्यार नहीं था
हम बड़े हुये थे अपने प्यार के साथ-साथ
खेलते-कूदते, लड़ते-झगड़ते
और एक-दूसरे को पढ़ते।

हम बहादुर थे
हमें डर नहीं था दुनिया का
हमने बसानी चाही थी खुद अपनी दुनिया
कि अचानक वह खो गयी
वही लड़की
जिससे हुआ था मुझे प्यार पहली बार।

तबसे
हाँ, तभी से खोज रहा हूँ वही लड़की
दूसरी लड़कियों में
नहीं, दूसरी औरतों में।

वह लड़की दिखती- सी है दूर से
मगर पास जाते ही
खो जाती है
दूसरी हो जाती है।

अन्वेषकों- सी जाती अपनी ज़िंदगी के दौरान
मैं सुनता रहा दूसरों से कि
वह लड़की अब भी उसी दुनिया में है
जिससे हम डरते नहीं थे कभी भी।

सुनता आ रहा हूँ
सुखी है वह अपने आस-पास के शाही ठाट से
औरतें इन्ही सबसे तो सुखी रहती हैं।
फिर भी
मेरा मन करता है कि
मैं अपने उस कस्बेनुमा शहर के छोटे-से बाज़ार में जाऊँ
और खरीदूँ उसके लिये
गहरे लाल रंगों की ग्यारह चूड़ियाँ
एक शीशी कन्नौजी इत्र
और लाल-लाल आलता
एक कोई पतले किनारों वाली एकलाई
और सब कुछ एक छोटी- सी गठरी में लिये हुए
पहुँच जाऊँ उसके दरवाजे पर
देने एक बहुत छोटी-सी भेंट शगुन जैसी
अपने सुखी सम्पन्न प्यार को।
उस लड़की को
जिसने मुझसे भी किया था प्यार पहली बार।

वह लड़की
सुनता हूँ
दुनिया में कहीं है
और बहुत सुखी है
न जाने कैसे…मेरे बिना…
वह लड़की।

{कृष्ण बिहारी}

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