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सितम्बर 26, 2016

अभी कई बातें …(Sándor Weöres)

sandorअभी तो कहने को कई बातें शेष हैं,

घटनाएं जिन्हें हमने जिया,

बातें जो हमने सीखीं,

वस्तुएं जिन्हें हमने देखा,

और मुलाकातें जो कई बार हुईं

और वे जो हुईं सिर्फ एक बार,

हर फूल इंतजार कर कर रहा है अपना जिक्र किये जाने का,

हर मुट्ठी भर धूल इस लायक है कि उस पर ध्यान दिया जाए,

मगर जब इन पर कुछ कहने का मौक़ा आएगा इनमें से सिर्फ एक,

और उस एक के भी कुछ टुकड़े समा पायेंगें कहने में,

जहां तक स्मृतियों का सवाल है मनुष्य करोड़पति होता है,

मगर जब उन्हें कलमबद्ध करने का वक्त्त आता है तो

वह पाता है खुद को कंगाल,

लगभग हर चीज किताब के बाहर छूट जाती है,

और अंदर रह जाते हैं चंद टुकड़े और स्वप्न|

(Sándor Weöres, हंगेरियन कवि)

प्रस्तुति – साभार विनोद शर्मा

 

जनवरी 10, 2015

छीन लो धर्म ग्रंथ मनुष्यों से…

मनुष्य से घृणा कर के

कौन लोग

कुरान, वेद, बाइबल

चूम रहे हैं बेतहाशा

किताबें और ग्रन्थ छीन लो

जबरन उनसे

मनुष्य को मार कर ग्रन्थ पूज रहा ढोंगियों का दल

सुनो मूर्खों,

मनुष्य ही लाया है ग्रन्थ

ग्रन्थ नहीं लाया मनुष्य को!

(नजरुल इस्लाम)

फ़रवरी 1, 2014

जीवन रस की हर बूँद पी लेना : संत सिद्धार्थ

जीवन हमें मिलता है तो इसलिए नहीं कि हम मौत के साये में जीकर जीवन के पलों को व्यर्थ कर दें या मौत का इन्तजार करें कि एक दिन वह आयेगी इसलिए उसे रोकने के साधन जुटा लें| मौत आनी है एक दिन यह बोध होना अत्यंत आवश्यक है लेकिन यह आवश्यक इसलिए है कि एक दिन मौत आकर जीवन को अपने साथ ले जायेगी इसलिए जीवन के हर पल को पूरी तरह जीना बेहद जरूरी है| मौत के सत्य का बोध इसलिए नहीं कि उसके आने के भय में जीवन को बच बच कर जीने लगें, जो करना चाहते हैं उसे कल पर टालने लगें|

जीवन के हर पल को सघनता से जीना, हर पल को जीने में अपने अंतस के गहनतम तल तक की उर्जा लगा देना तभी पूर्णता की अनुभूति होगी और किसी भी बात में अटकने से बच जाओगे| जीवन का हरेक पल का एकमात्र लक्ष्य है मनुष्य को अनुभूति देकर उसके पार पहुंचाना|

ऊर्जा को बचाने वाले कंजूस का जीवन मत जीना, न ही पलों को संजोकर रखने वाले जमाखोर का जीवन जीना| कुछ अच्छा करने की इच्छा बलवती हो जाए तो उसे कर गुजरना क्योंकि केवल करने से ही उसे समझ पाओगे, उसके पार हो पाओगे अगर दमन करते रहोगे, कल परसों पर बात को टालते रहोगे तो चेतनता पर इच्छाओं का बोझ लदता चला जाएगा और जब जाने का मौक़ा आएगा तो उस समय बेहद दरिद्र जीवन जीकर मौत के चंगुल में जाने का भाव सारे जीवन की व्यर्थता की पीड़ा को और घनीभूत कर देगा| जब जाना हो तो इच्छाओं की स्लेट एकदम कोरी हो, यही शर्त है श्रेष्ठ तरीके से जीवन जीने की|

तुम्हे पहाओं पर चढ़ना है, तैरना सीखना है, गीत गाना सीखना है, वाद्ययंत्र बजाने सीखने हैं, चित्रकला सीखनी है, मूर्ति बनाना सीखना है, कोई खेल विशेष खेलना है, कहीं यात्रा पर जाना है, विभिन्न स्थान देखने हैं,एक कविता,कहानी,उपन्यास, या किताब लिखनी है, या कुछ भी सीखना है, तो ऐसी सब इच्छाओं की पूर्ती करने के प्रयास ही एकमात्र रास्ता  है| इन्हें टालना मत क्योंकि नहीं पता कि फिर इन रास्तों से गुजरने का मौक़ा मिले न मिले| मौत जब दस्तक दे तो उसके सामने गिडगिडाने की जरुरत न पड़े कि अभी तो यह रह गया था वह रह गया था करने से|

मौत हमारे हाथ की बात नहीं पर जीवन कैसे जियें यह पूरी तरह से हमारे वश में है| बच्चों को देखते हो कैसे जो वे करना चाहते हैं उसे करने में पूरी तल्लीनता से मगन हो जाते हैं बस वही तो कुंजी है जीवन जीने की जिसे बड़े होते होते सब लोग कहीं खो देते हैं और फिर जीवन भर दुख से भरे रहते हैं कि यह नहीं कर पा रहे, वह नहीं कर पा रहे| नौकरी और व्यवसाय के कारण सब छुटा जा रहा है, पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण कुछ छुटा जा रहा है| जब करने की इच्छा सच्ची हो तो उसे करने का वक्त भी निकल जाता है| हो सकता है गले गले तक जिम्मेदारियों में डूबे हुए हो पर तब भी समय और ऊर्जा निकालना उन कामों को करने के लिए जिन्हें करना चाहते हो केवल अपने लिए, अपने अंतर्मन को आनंद पहुंचाने के लिए|

जरूरी नहीं कि हर काम में औरों को पीछे छोड़कर सर्वश्रेष्ठ स्थान पाने के लिए प्रयास किये जाएँ और जब तक ऐसा न लगे कि अच्छा स्तर पा लिया है तब तक काम शुरू न किया जाए| बहुत बार ऐसा होता है कि सपने पाल लिए जाते हैं कि अगर ऐसा न करके वैसा करते जो जीवन कुछ और ही होता| जिस मार्ग को चुनना चाहते थे उस पर अब चलना शुरू करके देखो| ऐसा भी हो सकता है कि दूसरों की देखादेखी उस मार्ग पर चलने की इच्छा बलवती हुयी थी| अपने मन की सच्ची संतुष्टि और आनंद के लिए कामों को करो| जीवन में ऐसा हल्का महसूस करने लगोगे जैसा पहले कभी नहीं किया| बोझ हटाओ उन सब बातों का जिनका दमन किया है, या जिन्हें कर नहीं पाए हो| जितना संभव हो उन्हें करने का प्रयास करो|

जीवन को जी लोगे तो मौत के भय का कोई अर्थ नहीं रह जाता वह अटल सत्य की तरह आयेगी पर तब वह तुम्हारी दमित इच्छाओं को साथ नहीं लेकर जायेगी|

जाते समय कोरे कोरे जाओ इससे बेहतर योगदान धरती पर तुम नहीं दे नहीं सकते|

सारे अध्यात्मिक संदेशों में महत्वपूर्ण है यह बात कि – जीवन को जियो!

जुलाई 29, 2011

जीवन प्रश्न भी और उत्तर भी

किसी दूसरे को
जानने के लिए
पहले स्वयं को
जानना जरूरी है
स्वयं से प्रश्न करना
और
स्वयं ही उसका उत्तर खोजना
इसलिए जरूरी है कि
हर व्यक्ति को
अपने जीवन का रास्ता
स्वयं ही तय करना है
तुम स्वयं ही गुरु हो
और शिष्य भी स्वयं ही हो
यह भूल जाओ कि
तुम कुछ जानते हो
स्वयं से प्रश्न करो कि
जीवन क्या है और क्योँ है?
इस प्रश्न का उत्तर
तुम्हारा मन, बुद्धि और तर्क नहीं दे सकते
इसका उत्तर जीवन की उस
बंद किताब की तरह है
जिसको तुम यदि
खोलने की चेष्टा ही न करो
तो यह तुम्हारी अलमारी के
एक कोने में पड़ी
व्यर्थ सी चीज़ रह जायेगी
तुम्हारी जीवन की किताब के भी
अनेक पन्ने हैं
जिनको तुम्हे
पढ़ने के लिए
जानने के लिए
खोलने का कष्ट
करना ही होगा
जीवन की इस किताब का एक पन्ना
तुम्हारी जीवनयात्रा का
एक कदम मात्र है
तुम्हे जीवनयात्रा
एक एक कदम से
तय करनी है
यदि तुम बिना देखे छलांग लगाओगे तो
तुम्हारा गिरना तय है
इस जीवनयात्रा का कोई शॉर्ट-कट नहीं
न कोई गुरु है
जो तुम्हे
यह घुट्टी पिला दे कि
तुम्हे कहाँ से और
कैसे चलना है
तुम्हे तो
स्वयं ही चलना है
और वह भी कदम कदम पैदल
तभी तो तुम जान पाओगे कि
यह यात्रा कितनी कष्टदायी
और कितनी सुखदायी है
इस यात्रा की मंज़िल और यात्रा
दोनों एक दूसरे के पर्याय हैं
और तभी यह जीवनयात्रा
‘जीवन’ और ‘यात्रा’
एक दूसरे में
ऐसे समाए हुए हैं
जैसे
जीवन एक प्रश्न
और जीवन ही उसका उत्तर
एक दूसरे में
समाए हुए हैं!

(अश्विनी रमेश)

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