Posts tagged ‘Khwahish’

जनवरी 15, 2014

आखिरी ख्वाहिश तुम

आलम-ए-दिल पे कोई फर्क कहाँ?mirrorwoman-001

दूर हो तुम

चाहे बहुत करीब मेरे

पास बुला के भी मजबूर कहने से

कि

दिल में बसते हैं कितने अरमान मेरे…

कहना तो है बहुत कुछ…

मगर कहें कैसे?

लफ्ज़ आते आते लब तक

कही जम जाते हैं

उठते तो हैं तूफान कितने

दिल से,

बस उठते हैं और कहीं थम जाते हैं…

दिल का तो क्या?

चाहे बस कि हरदम

बस इक तुम्हारी ही याद में गुम हो…

बहुत क्या कहना?…

बहुत क्या सुनना?

बस फकत जान लो इतना के…

मेरी आखिरी ख्वाहिश तुम हो…

Rajnish sign

नवम्बर 16, 2013

चिराग जिस्मों के

होता  है अहसास बहुत अलग सा  dreamwo-001

जब

आँखे खोलते हैं

सपने मेरे

तुम्हारी बाहों में…

अजब सी इक सिहरन

जैसे

छू  गयी हो लपक के बिजली आसमान की

दिल दिमाग सुन्न बस…

  वश में तुम्हारे सब|

एक ही ख्वाहिश रह जाती है

बस कि

चैन पाएं

मुंह छुपा कर

तुम्हारे सीने में…

सपने मेरे हद बेचैन

जागा करते हैं रात भर

आओ कि

इन्हें चैन से  नींद तो आये

रौशन रहे रात

चिरागों की तरह जलते जिस्मों की बदौलत

आओ कि

फिर चाहे सुबह न उगे

चाहे तो आए

कि फिर न दिन आए…

(रजनीश)

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