Posts tagged ‘Khoobsoorat’

फ़रवरी 2, 2014

खूबसूरत रात…

कल रात बहुत खूबसूरत थीakhiri-001

आँखों में गुजरी

फिर भी  बहुत छोटी थी

कल रात

मेरा चाँद मेरी बाँहों में पिघला था

सुलगते बदन में

कैसे कोई कैसे रह सकता है?

सर्द चांदनी की अगन तब से तारी है हम पे

ये रात इतनी कम क्यों थी?

Rajnish sign

जनवरी 13, 2014

पूर्णिमा का चाँद

पूर्णिमा का चाँद manmoon-001

लुका-छिपी खेलता है

जाने मुझसे

कि इन आते-जाते पहाड़ों से

(न, पहाड़ नहीं, अरावली की छोटी पहाडियों से)

पर, हर बार, अब वह झांकता है-

पहाडियों के पार

तुम्हारी कलाएं,

दिखाता है, हर बार-

कभी मासूम, कभी गुम-सुम,

कभी शोखी, कभी हँसी

कभी मोहक, कभी मादक

कभी स्नेह, कभी दुलार

कभी रूठना, कभी तकरार

कभी लाड, कभी प्यार

बाराहों पहाडियों के बीच

तुम्हारे रंग

आते हैं, जाते हैं-

इतने पास,

कि बस

अब छुआ

कि तब छुआ

इतना पास,

कि महसूस होती है साँस

और तपिश दहकते होठों की|

पर तभी,

ऊँची पहाड़ी सड़क से

अजमेर जगमगाता है

और चाँद

छिटक कर

जा बैठता है –

दूर आसमान पर

-शायद दिल्ली के-

बस ठीक उसी क्षण

फोन का बजना

उधर से तुम्हारा विभोर हो कहना

– आज का चाँद बेहद खूबसूरत निकला है!

Yugalsign1

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