Posts tagged ‘Kathin’

जनवरी 30, 2014

मीठे गीत जीवन के

कितना छोटा है जीवन

यह तो मीठे गीतों

और

आराम से बहती हवा

का आनंद लेने के लिए है

पर हरेक कहता है

जीवन को शांतिपूर्वक जीना संभव नहीं ,

और हरेक को मुट्ठी तान कर

जीवन में  कठिन, और जटिल रास्तों से जूझना चाहिए |

लेकिन मुझे जो दिखाई देता है

जहां तक मेरी समझ जाती है

जहां तक दृष्टि देख सकती है

जहां तक मेरे हाथ पहुँच सकते हैं

जहां तक मैं चल सकता हूँ

– गीत रहेंगे और हवा के झोंके भी बहेंगे

मुस्कुराहट तुम बने रहना

तमाम बाधाओं और शत्रुओं

से घिरे होने के बावजूद

मैं इन् सबको साथ लेकर

चलता रहूँगा

इनसे पार जाने के लिए

Yugalsign1

फ़रवरी 28, 2012

लिखती होगी नाम मेरा वो

जिन यादों को नींद न आये

उन्हें सुलाना बहुत कठिन है

दिल कि दुनिया जिन्हें बसाए

उन्हें भुलाना बहुत कठिन है|

लिखती होगी नाम मेरा वो

आज भी अपने तकिये पर

यह तो केवल सुई ही जाने

चली वो कितना बखिए  पर |

दोनों की इस व्यथा कथा को

आज सुनाना बहुत कठिन है|

बहुत ज़मीनी दूरी है पर

रहती है वो पास ही मेरे

उसकी यादों में गुजरे जों

वे पल  हैं सब खास ही मेरे|

क्यों मैं उसकी कसमें खाऊं

जिसे बुलाना बहुत कठिन है |

सच कहता हूँ तुमसे यारों

मेरी तरह ही जीती होगी

मेरे बिना ज़िंदगी को वह

ज़हर समझकर पीती होगी|

उसका नाम बता देता पर

सच झुठलाना बहुत कठिन है|

{कृष्ण बिहारी}

 

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