Posts tagged ‘Kareeb’

फ़रवरी 27, 2014

हर सुबह मौत मुझ पे हंसती है

हर शामyadein-001

उदासी भरी आस
दिल के दरवाजे तक

चली आती है यूँ ही
जैसे मौत इक इक कदम कर
और कुछ और करीब आती हो…
चलो आओ तुम अब तो…

के …
अब सहा नहीं  जाता…

इंतज़ार की लंबी रातों का दर्द…

बहुत दुखता है…

बहुत दुखता है…

हर शाम का तेरी यादों को रौशन करना

देहरी तकना…

फिर अँधेरे की चादर भिगोना…

बहुत दुखता है…

देह हर दम जैसे दर्द के बीज बोती है

और अपनी ही फसल के बोझ तले रोती है
आसमां की चादर  हर रोज मुझ पे…

कफ़न होती है …

हर सुबह मौत मुझ पे हंसती है

हर सुबह ज़िन्दगी मुझ को रोती है…

Rajnish sign

Advertisements
जनवरी 15, 2014

आखिरी ख्वाहिश तुम

आलम-ए-दिल पे कोई फर्क कहाँ?mirrorwoman-001

दूर हो तुम

चाहे बहुत करीब मेरे

पास बुला के भी मजबूर कहने से

कि

दिल में बसते हैं कितने अरमान मेरे…

कहना तो है बहुत कुछ…

मगर कहें कैसे?

लफ्ज़ आते आते लब तक

कही जम जाते हैं

उठते तो हैं तूफान कितने

दिल से,

बस उठते हैं और कहीं थम जाते हैं…

दिल का तो क्या?

चाहे बस कि हरदम

बस इक तुम्हारी ही याद में गुम हो…

बहुत क्या कहना?…

बहुत क्या सुनना?

बस फकत जान लो इतना के…

मेरी आखिरी ख्वाहिश तुम हो…

Rajnish sign

%d bloggers like this: