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सितम्बर 26, 2016

अभी कई बातें …(Sándor Weöres)

sandorअभी तो कहने को कई बातें शेष हैं,

घटनाएं जिन्हें हमने जिया,

बातें जो हमने सीखीं,

वस्तुएं जिन्हें हमने देखा,

और मुलाकातें जो कई बार हुईं

और वे जो हुईं सिर्फ एक बार,

हर फूल इंतजार कर कर रहा है अपना जिक्र किये जाने का,

हर मुट्ठी भर धूल इस लायक है कि उस पर ध्यान दिया जाए,

मगर जब इन पर कुछ कहने का मौक़ा आएगा इनमें से सिर्फ एक,

और उस एक के भी कुछ टुकड़े समा पायेंगें कहने में,

जहां तक स्मृतियों का सवाल है मनुष्य करोड़पति होता है,

मगर जब उन्हें कलमबद्ध करने का वक्त्त आता है तो

वह पाता है खुद को कंगाल,

लगभग हर चीज किताब के बाहर छूट जाती है,

और अंदर रह जाते हैं चंद टुकड़े और स्वप्न|

(Sándor Weöres, हंगेरियन कवि)

प्रस्तुति – साभार विनोद शर्मा

 

अगस्त 14, 2011

एक पूरा दिन

उगते सूरज की सुबह
और डूबते सूरज की शाम के बीच
एक पूरा दिन है।

समस्यायों की फेहरिश्त के साथ
लड़ाई शुरु होती है
एक के अंत पर
दूसरी रोती है।

यह दोपहर से पहले का हाल है
उपलब्धियों के बीच
आदमी, कंगाल है।

मरीचिका की मार से
टूटता ज़िस्म लिये एक दौड़ जारी है
कुछ थोड़ा और
पाने की ललक भरी लाचारी है।

फटी-फटी आँखों पर
धूल अटी रुमाल है
सुबह की लाली में होश था
शाम की लाली निढ़ाल है।

और
दोनों के बीच
एक पूरा दिन है।

{कृष्ण बिहारी}

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