Posts tagged ‘Kampan’

नवम्बर 28, 2013

कह तो दूँ …शब्द कहाँ हैं

love story-001दे तो दूँ

अभिव्यक्ति

उन  अहसासों को

प्रथम छुअन के

स्पंदन को

इंतज़ार की

धडकनों को

उष्ण देह की

तपन को

होठों की

लरजन को

ठन्डे बदन की

कम्पन को

पर तुम ही कहो

शब्द कहाँ  से लाऊं?

Rajnish sign

नवम्बर 24, 2013

प्रथम प्रेम-मिलन

तब क्या होगाsilentlove-001

जब मुखातिब होंगे

हम तुम,

होंठो पे जमी बर्फ को

कैसे पार करेंगे लफ्ज़ तब?

बहुत समय से लफ्ज़ जमे हैं लब पे

तपते हुए लबों से अपने पिघला सको तो

पी सकोगे इन्हें

पर देह के कम्पन अनुनाद में

पुल टूट नहीं जायेंगे क्या?

थरथराते लब

क्या इतनी ही आसानी से

कह सकेंगे तब –

मुझे तुमसे प्यार है…

होगी दरकार आवाज़ की मौन को

या कि

मौन खुद ही आवाज़ बनेगा?

अगर सुनोगी मेरे सीने पे अपना सर  रखकर

तुम अपना नाम

मेरी आती जाती साँसों में

ये तो झंझावत में न

बदल जायेंगी क्या?

तुम्हारी मादक  देह गंध

रहने देगी ज़मीन पैरों तले क्या?

गिरने से कैसे बचाएंगी बाहें तुम्हारी?

क्या होगी उतनी ही तेज़ तुम्हारी सांसें भी?

उठाना गिरना वक्ष का कैसे सिमट पायेगा आँखों में?

हाथ में रखा हाथ कापेंगें नहीं क्या?

शिकायत

इनकार

इज़हार

मनुहार

रूठना

मनाना

लाज शर्म

मिलन विरह

पास दूर

सारे ये शब्द खो नहीं  जायेंगे क्या

आवेशित हृदयों के स्पंदन में?

प्रथम प्रेम मिलन में होगा क्या?

इसी सब में

घिरा बैठा रहता हूँ

दिन रात आजकल…

Rajnish sign

नवम्बर 13, 2013

कुछ कुछ होता है!

तरंगों के कंपनlovers-001

पोरों के स्पर्श

सुकुमार वक्ष की कोमलता…

श्यामवर्णी चादर ओढ़े सांस

चुनरी की रेशमी ओट

संगीत भरे चित्रालय में

आँखों-आँखों के संवाद में

झुककर पांवों, तलुओं का स्पर्श

बांह को पकड़ कर भींच देना

गोद में रखे पॉपकार्न को टूंगना

कपोलों का चुम्बन

चेहरे पर भावों के इन्द्रधनुष

तुमने कहा…

कुछ कुछ होता है

Yugalsign1

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