Posts tagged ‘Kadam’

दिसम्बर 1, 2013

ये क्या जिद ले बैठा

सुकून भी गया था एक बार मंदिर में,

पर

hoffman-001घडियालों के शोर से घबरा कर भाग आया|

सोचता हूँ बंद कमरे में गुमसुम बैठा,

ले बैठा मैं ये जिद,

ये क्या जिद मैं ले बैठा?

अपनों के आजमाने से आजिज आकर,

गैरों की तरफ कदम बढाए,

अब ये बैचेनी और बेबसी है मेरी कि

दोनों ही तरफ,

एक से लोग नजर आए हैं|

Yugalsign1

नवम्बर 28, 2013

उठो, समय हो गया है!

थके,manroad-001

बोझिल कदम लिए बैठा है वह

धुंए और धूल से भरी आँखें लिए

चौराहे की बैंच पर

आते-जाते परिंदों की आवाजाही

भुट्टे टूंगने की जद्दोजहद

होटल लौटने का समय हो गया है|

असमंजस के चौराहे पर

लाठी को पटक-पटक कर मारा है

छोटे-बड़े दायरों में

आवाज के वृत बनते हैं-बिगड़ते हैं

आसमान से झाँक कर,

पर कोई तो मुस्कराया है

कि-

नई डगर चलने का समय हो गया है|

Yugalsign1

नवम्बर 10, 2013

दीवाना फिर पी के आया है…

lovers-001तेरे मिलने की तमन्ना है

लहू में इस तरह कुछ

जैसे गिर गयी हो खुल के

सिन्दूर की डिबिया

दूध भरे बर्तन में…

न अब सिन्दूर है…

न दूध है

ये जो भी है देखने में

गुलाबी है बहुत

लेकिन…

ऐसे जहरीले नशे से भरा…

जो उतरे न फिर

जो चढ़ जाए एक बार…

तेरे गुलाबी नर्म होठों का मधु-विष

पीया था मैंने एक बार बस यूँ ही…

‘प्यास से मरता जैसे कोई जल के धोखे  ज़हर  पी ले’

लड़खड़ा रहे हैं कदम दर-ब-दर अभी तक…

लोग कहते हैं  देखो दीवाना फिर

पी के आया है…

(रजनीश)

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