Posts tagged ‘Jawan’

जून 4, 2014

आखिरी ख़त

बहुत देर से शब्द मिल नहीं रहे हैं…tum-001

खाली कुएं से तो अपनी ही आवाज़ लौटेगी न

अब किसको आवाज़ दूं?

किसको पुकारूं??

दिल का खला भरा नहीं अब तक

तेरे इंतज़ार में आँखें पत्थर हो गयीं

आवाज़ भी अपनी ग़ुम गयी जैसे

दिल के कुएं से टकरा के वापस जो नहीं आई…

सोचता हूँ कि आखिरी ख़त भी लिख रखूं

तुम इस का जवाब मत देना

मैं मुन्तजिर न रहूँगा

ये सिलसिला-ऐ-तबादला-ऐ- ख्याल रुक जाये अब

बेवज़ह गर्म ख्यालों का जवां रहना ठीक तो  नहीं

ये सिलसिला सौ नए अरमानो का वायस बनता है

ये नहीं टूटेगा तो लाजिमी दिल टूट जायेंगे

बंद करना ही होगा हर रास्ता

हर झरोखे के मुंह पे पत्थर रखना ही होगा

मुलाकात की हर वज़ह मिटानी ही  होगी

मिटाने होंगे

इस किराये के मकां के पते के निशां

कल से मैं तुम्हे नहीं मिलूँगा यहाँ…

Rajnish sign

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जनवरी 14, 2014

रूह और जिस्म

जिस्म मिलते हैं तो रूहें मिलती हैं…akhiri-001

या रूहें मिलती हैं तो जिस्म…

रूह और जिस्म जुदा नहीं कभी

एक के बिना दूसरे का मरण तय

रूह और जिस्म के इस झंझट में

कौन तय करे…

कौन ऊपर

कौन नीचे…

रूह अगर मरती नहीं

तो जिस्म चुकते ही क्यों अपने

अस्तित्व को खो देती है?

मरना ही तो हुआ?

जिंदा अगर यादों में रहने को भी कहते हैं

तो जिस्म तेरा मेरी यादों में

न सिर्फ जिंदा है…

जवान भी है…

हर चेहरे में…

तेरे जैसे रंग में

Rajnish sign

मार्च 12, 2012

सौ बार कहेंगे

तुम आये तो रंग मिले थे

गए तो पूरी धूप गयी

शायद इसको ही कहते हैं

किस्मत के हैं रूप कई

भटकी हुयी नदी में कितनी बार बहेंगे हम|

फूल-फूल तक बिखर गए हैं

पत्ते टूट गिरे शाखों से

एक तुम्हारे बिना यहाँ पर

जैसे हों हम बिना आँखों के

फिर भी इस अंधियारे जग में हंस कर यार रहेंगे हम|

ह्रदय तुम्हारे हाथ सौंपकर

प्यार किया पागल कहलाये

तुमसे यह अनमोल भेंट भी

पाकर कभी नहीं पछताए

यहीं नहीं उस दुनिया में भी यह सौ बार कहेंगे हम|

संधि नहीं कर सके किसी से

इसलिए प्यासा यह मन है

इतने से ही क्या घबराएं

यह तो पीड़ा का बचपन है

इसे जवान ज़रा होने दो वह भी भार भी सहेंगे हम|

मिलने से पहले मालूम था

अपना मिलन नहीं होगा प्रिय

अब किस लिए कुंडली देखें

कोई जतन  नहीं होगा प्रिय

कल जब तुम इस पार रहोगे तब उस पार रहेंगे हम …

{कृष्ण बिहारी}

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