Posts tagged ‘Janta se thagi ki virasat’

अप्रैल 14, 2011

जनता से ठगी की विरासत

तुम सदा से
रहे हो मेरे खून के प्यासे
बैल के स्थान पर
मुझे जुता हुआ देख कर
आँखे चमक उठती थी तुम्हारी
सूद में ही ले जाते थे
पसीने से सिंची फसलें।

फाके थे मेरी भूखी मेहनत का हासिल
आज भी
उन्ही विदेशी लुटेरों के साथ
कितनी ही ईस्ट इण्डिया कम्पनियों के
यानी मल्टीनेशनलों के
पैरोकार हो तुम!

मेरे खेत कल की बात हुए
शहर-कारखानों ने निगल लिए
फिर किस्तों में सूद का बाजार है गर्म
फ्लैट, कार, जींस, मोबाइल और व्हिस्की के जाल में
छटपटाने को मजबूर हूँ मैं।

राजा, मंत्री और कारिन्दे
बेखौफ भ्रष्टाचार की फसल काट रहे हैं
वही बेईमान अँधेरा है जो के था
यहाँ कोई मसीहा रौशनी भी लाए तो क्या हासिल?

सूली उठाये साथ चलने वाले
सयाने गीदड़ हैं शेर की खाल में
संवेदनाओं की नीव पर
सत्ता का महल खड़ा करने वाले।

मुझे ठोकरों के सिवा
न कुछ मिला है न मिलेगा
गरीब का लहू-पसीना सदा से
मुफलिसी की विरासत है और रहेगा।

(रफत आलम)

%d bloggers like this: