Posts tagged ‘Jagna’

अप्रैल 1, 2014

गंगा और महादेव… (राही मासूम रज़ा)

मेरा नाम मुसलमानों जैसा है

मुझको कत्ल करो और मेरे घर में आग लगा दो

मेरे उस कमरे को लूटो जिसमें मेरी बयाने जाग रही हैं

और मैं जिसमें तुलसी की रामायण से सरगोशी करके

कालीदास के मेघदूत से यह कहता हूँ

मेरा भी एक संदेश है।

मेरा नाम मुसलमानों जैसा है

मुझको कत्ल करो और मेरे घर में आग लगा दो

लेकिन मेरी रग-रग में गंगा का पानी दौड़ रहा है

मेरे लहू से चुल्लू भर महादेव के मुँह पर फेंको

और उस योगी से कह दो- महादेव

अब इस गंगा को वापस ले लो

यह जलील तुर्कों के बदन में गढ़ा गया

लहू बनकर दौड़ रही है।

[राही मासूम रज़ा]

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नवम्बर 25, 2013

मेरे सपनो की ताबीर

एक ख़याल पे मुहर धर दीwoman-001

कल रात ने,

मेरी सुबह ओ’ शाम-

बस जैसे तुम्हारा जगना, सोना

तुम्हारी सुबह-

मेरी तमन्नाओं का जगना

तुम्हारी रात-

मेरे ख्वाबों को पर लगना

लेकिन कल

स्याही गहरी हुयी

एक और हकीकत की भी –

न तुम थीं,

न तुम हो,

न तुम होगी,

मेरे लिए

मेरी,

मेरे सपनो की ताबीर कभी…

अक्सर मैं तुम्हारी

बेजारी पढता हूँ…

तुम ढँक नहीं पाती

झल्लाहट,

खिजलाहट…

तुम न चाहो तो भी

लफ्ज़

कोई न कोई

कर ही जाता है

इन्हें बयाँ…

Rajnish sign

नवम्बर 16, 2013

चिराग जिस्मों के

होता  है अहसास बहुत अलग सा  dreamwo-001

जब

आँखे खोलते हैं

सपने मेरे

तुम्हारी बाहों में…

अजब सी इक सिहरन

जैसे

छू  गयी हो लपक के बिजली आसमान की

दिल दिमाग सुन्न बस…

  वश में तुम्हारे सब|

एक ही ख्वाहिश रह जाती है

बस कि

चैन पाएं

मुंह छुपा कर

तुम्हारे सीने में…

सपने मेरे हद बेचैन

जागा करते हैं रात भर

आओ कि

इन्हें चैन से  नींद तो आये

रौशन रहे रात

चिरागों की तरह जलते जिस्मों की बदौलत

आओ कि

फिर चाहे सुबह न उगे

चाहे तो आए

कि फिर न दिन आए…

(रजनीश)

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