Posts tagged ‘Jag’

मार्च 14, 2013

यदि तुम मुझसे दूर न जाते …

मुझे, अकेलेपन में साथी

याद तुम्हारी कैसे आती

आंसू रहकर इन आँखों में अपना नीड़ कैसे बनाते?

यदि तुम मुझसे दूर न जाते|

तुम हो सूरज-चाँद जमीन पर

किसका क्या अधिकार किसी पर

मेरा मन रखने की खातिर

तुम जग को कैसे ठुकराते?

यदि तुम मुझसे दूर न जाते|

आँख आज भी इतनी नम है

जैसे अभी अभी का गम है

ताजा सा यह घाव न होता,

मित्र तुम्हे हम गीत सुनाते

यदि तुम मुझसे दूर न जाते|

पल भर तुमने प्यार किया है

यही बहुत उपकार किया है

इस दौलत के आगे साथी किस दौलत को गले लगाते?

तू आये तो सेज सजाऊं

तेरे संग भैरवी गाऊँ

यह मिलने की चाह न होती तो मरघट का साथ निभाते!

यदि तुम मुझसे दूर न जाते|

{कृष्ण बिहारी}

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मार्च 12, 2013

गीत गुनगुनाने दो

 

सपने हैं शीशे से साफ़ करो इनको

सपनों की गलती क्या माफ करो इनको |

मन में कुछ आने दो कुछ मन से आने दो

गीत गुनगुनाने दो …|

मोहक हर दर्पण था मोह गया मन को

आकर्षण बंधन का तोड़ गया तन को |

सुख को तुम माने दो दुख में कुछ गाने दो

गीत गुनगुनादे दो…|

मन को तो रोक लिया मिलने से उनको

भीतर के जग में अब रोकोगे किनको |

सृष्टि है लुभाने दो दो दृश्य हैं रमाने दो

गीत गुनगुनाने दो…|

दूर जा चुके हैं सब जाना था जिनको

अब किसे पुकारें हम आना है किनको |

अब दिया बुझाने दो दर्द को सुलाने दो

गीत गुनगुनाने दो…|

{कृष्ण बिहारी}

मार्च 12, 2012

सौ बार कहेंगे

तुम आये तो रंग मिले थे

गए तो पूरी धूप गयी

शायद इसको ही कहते हैं

किस्मत के हैं रूप कई

भटकी हुयी नदी में कितनी बार बहेंगे हम|

फूल-फूल तक बिखर गए हैं

पत्ते टूट गिरे शाखों से

एक तुम्हारे बिना यहाँ पर

जैसे हों हम बिना आँखों के

फिर भी इस अंधियारे जग में हंस कर यार रहेंगे हम|

ह्रदय तुम्हारे हाथ सौंपकर

प्यार किया पागल कहलाये

तुमसे यह अनमोल भेंट भी

पाकर कभी नहीं पछताए

यहीं नहीं उस दुनिया में भी यह सौ बार कहेंगे हम|

संधि नहीं कर सके किसी से

इसलिए प्यासा यह मन है

इतने से ही क्या घबराएं

यह तो पीड़ा का बचपन है

इसे जवान ज़रा होने दो वह भी भार भी सहेंगे हम|

मिलने से पहले मालूम था

अपना मिलन नहीं होगा प्रिय

अब किस लिए कुंडली देखें

कोई जतन  नहीं होगा प्रिय

कल जब तुम इस पार रहोगे तब उस पार रहेंगे हम …

{कृष्ण बिहारी}

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