Posts tagged ‘Ishq. Mohabbat’

दिसम्बर 3, 2015

प्रेम – एक थीसिस

shashisimi-001मैत्री,सख्य, प्रेम – इन का विकास धीरे-धीरे होता है ऐसा हम मानते हैं: ‘प्रथम दर्शन से ही प्रेम’ की सम्भावना स्वीकार कर लेने से भी इस में कोई अन्तर नहीं आता| पर धीरे-धीरे होता हुआ भी यह सम गति से बढ़ने वाला विकास नहीं होता, सीढ़ियों की तरह बढ़ने वाली उस की गति होती है, क्रमश: नये-नये उच्चतर स्तर पर पहुँचने वाली|

कली का प्रस्फुटन उस की ठीक उपमा नहीं है, जिस का क्रम-विकास हम अनुक्षण देख सकें: धीरे-धीरे रंग भरता है, पंखुड़ियाँ खिलती हैं, सौरभ संचित होता है, और डोलती हवाएँ रूप को निखार देते जाती हैं|

ठीक उपमा शायद सांझ का आकाश है : एक क्षण सूना, कि सहसा हम देखते हैं, अरे वह तारा! और जब तक हम चौंक कर सोचें कि यह हम ने क्षण-भर पहले क्यों न देखा – क्या तब नहीं था? तब तक इधर-उधर, आगे, ऊपर कितने ही तारे खिल आए, तारे ही नहीं, राशि-राशि नक्षत्र-मंडल, धूमिल उल्कान्कुल, मुक्त्त-प्रवाहिनी नभ-पयम्बिनी- अरे, आकाश सूना कहाँ है, यह तो भरा हुआ है रहस्यों से, जो हमारे आगे उद्घाटित है…प्यार भी ऐसा ही है; एक समोन्नत ढलान नहीं, परिचिति के, आध्यात्मिक संस्पर्श के, नये-नये स्तरों का उन्मेष…उस की गति तीव्र हो या मंद, प्रत्यक्ष हो या परोक्ष, वांछित हो य वान्छातीत| आकाश चन्दोवा नहीं है कि चाहे तो तान दें, वह है तो है, और है तो तारों-भरा है, नहीं है तो शून्य-शून्य ही है जो सब-कुछ को धारण करता हुआ रिक्त बना रहता है…

(अज्ञेय : उपन्यास ‘नदी के द्वीप‘ में)

जून 30, 2011

प्रेम से भय कैसा

प्रेम में
खोना पड़ता है
बहुत सारी बातों को
बल्कि खो देना पड़ता है खुद को ही
इस भय से
प्रेम में पूर्ण-समर्पण
न कर पाने वालों
की संख्या अनगिनत है।

सतह पर ही तैरते रहने से
जल की गहराई
नहीं आँकी जा सकती
उसके लिये गहरे पानी पैठना
ही पड़ता है।

प्रेम में होने से
भय कैसा?
मानव जीवन
का सारा लेखा-जोखा बाँच
पता यही चलता है –
चिर काल से ही
प्रेम में उत्थान पाये
अस्तित्व ही
जी पाये हैं
काल की सीमाओं को
पार कर पाये हैं।

इस अदभुत अनुभव
को जी पाने
की संभावना
से मुँह क्यों मोड़ना?

प्रेम करो
प्रेम पाओ
प्रेम में होकर ही तो
पता चलता है
कि प्रेममयी मानव
इतना सब कुछ देख, जान,
और जी सकता है
जो कभी भी संभव न हो पाता
और जीवन कितने ही अनदेखे पहलुओं से
अनभिज्ञ ही रह जाता
अगर प्रेम उसके जीवन में न आया होता।

…[राकेश]

%d bloggers like this: