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दिसम्बर 13, 2013

देखें सूरज को मिलते हुए प्रेयसी रात्रि से

बैठे रहें पास पासsunset1-001

चुपचाप

न हम बोलें ना तुम कुछ,

उठती हुयी तरंगें तुम में

गुज़र जाएँ मुझ में हो कर

बस देखते रहें बेचैन सूरज को

मिलते हुए प्रेयसी रात्रि से,

कितने अधूरे हैं ये उजाले-अँधेरे

एक दूसरे के बगैर

जैसे…हम-तुम…

बस चुपचाप ही समझें इशारे,

 रंग बदलती शाम के

लाल होते आसमान के

घर लौटती चिड़ियों के

झुकती आँखों के

बहकती हुयी साँसों के

दहकते हुए होठों के

कंपकपाती  उंगुलियों के…

बस चुपचाप…

बैठे रहें पास पास

मैं और तुम…

पीते रहें हवा में घुली शराब को

उतर जाए लाल शाम हम में

उतर जाए बुखार साँसों का

बस बैठे रहें सर टिकाये एक दूसरे से

चुपचाप

पास पास  बस बैठे रहें…

Rajnish sign

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नवम्बर 21, 2013

एक टुकड़ा सच

कल नहीं होंगे विषादvon-001

जब हम-तुम याद करेंगे

कि-

जीवन जितना भी देता है

सहेजने- संजोने को होता है

सखे, पीड़ा का सत्व

सुखकर होगा अवश्य ही|

कल,

जब हम-तुम संधान कर चुकेंगे

कि –

होती है एक छोटी सी मुलाक़ात भी,

सम्पूर्ण

नहीं होता है सब कुछ बेमानी

मौन भी है बोलता कभी-कभी

प्रिये,

अमूल्य हैं पोरों पर अटके ये मोती

कल फिर मिलेंगे हम,

तो जानेंगे कि-

हमने जिया है

एक टुकड़ा सच

साथ-साथ

Yugalsign1

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