Posts tagged ‘Hissa’

दिसम्बर 1, 2013

टूट कर भी मुकम्मल रहूंगा

ख्वाब mirrorwoman-001

न चेहरा होता है

न बदन कभी

अगर

बिखरेगा भी तो

कितना बिखरेगा?

मैं  टूटा भी

सौ हिस्सों में गर

हर हिस्सा  मेरा मुकम्मल ही  रहेगा

मैं आइना नहीं

जो टूटा तो

अक्स  बाँटूगा तेरा टुकड़ों में

मेरे हर हिस्से में

तब भी

तुम पूरा का पूरा ही समा  सकोगी

Rajnish sign

नवम्बर 16, 2013

हर प्रीत नूतन है!

पांच बरस लंबी सड़क पर AB-001

पता नहीं सोता सा चला था शायद !

कि,

हर नया दिन,

पुराने का हिस्सा नहीं लगता|

लगता है, सड़क भी बनी है,

टुकड़ों-टुकड़ों में!

कल की याद ही नहीं कुछ-

बस अहसास भर होता है कि

कुछ गुजरा भर था|

मुझे कुछ याद नहीं है-

न परिणय

न चुम्बन

न कलह

जब तुमसे मिलता हूँ,

लगता है फिर कोंपलें फूट आई हैं

फिर नया सवेरा है

और हर बात,

हर प्रीत नूतन है|

Yugalsign1

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