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जुलाई 20, 2017

हमारी गाए – मोहम्मद इस्माइल

अप्रैल 28, 2011

Twitter : देवनागरी के सामने खड़ा एक जिन्न

अंग्रेजी शब्द Clone को देवनागरी में आसानी से क्लोन लिख सकते हैं क्योंकि आधे “” की गुंजाइश है।

अंग्रेजी शब्द Pure आसानी से देवनागरी में प्योर लिखा जा सकता है। आधे की उपस्थिति है।

पर जो शब्द अंग्रेजी के T
अक्षर से शुरु हों उनके साथ क्या किया जाये?

हिन्दी में या से शुरु होने वाले शब्दों को आसानी से रोमन में लिखा और पढ़ा जा सकता है।

अंग्रेजी वर्णमाला के T को हिंदी के और दोनों के संदर्भ में उपयोग में लाया जाता है और कोई दिक्कत नहीं आती। अगर रोमन में ऐसा लिखना हो कि ” दधीचि बड़े त्यागी महात्मा थे ” तो इस वाक्य के त्यागी शब्द को आसानी से रोमन में Tyagi लिखा और पढ़ा जा सकता है पर जब अंग्रेजी शब्द Tuning को देवनागरी में टयूनिंग लिखा जाता है तो क्या वह एकदम सही है? क्योंकि कायदे से इसे Tayuning पढ़ा जाना चाहिये।

अंग्रेजी के  शब्द Twin के साथ क्या किया जाता है जब इसे देवनागरी में लिखा जाता है?  इसे लिखते हैं ट्विन या ट्वीन, जो कि कतई अंग्रेजी के मूल शब्द के अनुरुप उच्चारण वाले शब्द नहीं हैं।

यही दिक्कत माइक्रो ब्लॉगिंग माध्यम के शब्द Twitter को देवनागरी लिपि में लिखने की है।

अगर इसे ट्विटर लिखें तो कायदे से इसका हिन्दी में इसका सही उच्चारण  TiwTar हो जायेगा जो कि अंग्रेजी के मूल उच्चारण से एकदम अलग है।

अगर इसे टविटर लिखें तो हिन्दी में इसका उच्चारण TawiTar हो जाता है जो कि पुनः अंग्रेजी के मूल उच्चारण से अलग है। तो क्या देवनागरी में इस शब्द को लिखा ही नहीं जा सकता।

अंग्रेजी के सही उच्चारण के तहत इस शब्द में की ध्वनि आधी बैठेगी, पर पहले ही अक्षर के रुप में आधे को कैसे लिखा जायेगा?

इस समस्या को इस तरह भी समझ सकते हैं – अगर Twitter शब्द के पहले अक्षर को हिन्दी में के बजाय की ध्वनि मिल जाती तो सही उच्चारण का सही लेखन होता त्वितर या त्विटर न कि तिवतर या तिवटर

हिन्दी की खासियत ही यही है कि जैसा लिखा जाता है वैसा ही पढ़ा जाता है और जैसा बोला जाता है वैसा ही लिखा भी जाता है।

हिंदी शब्दों को तो रोमन लिपि में लिखा जा सकता है पर ऐसा जरुरी नहीं कि देवनागरी भी अंग्रेजी शब्दों को ऐसी सड़क मुहैया करा दे जिस पर अंग्रेजी के शब्द सरपट दौड़ सकें।

ऐसी स्थितियों में जुगाड़ से काम चलाना पड़ता है।

मई 29, 2010

गज़ल क्या है

सुबह के इन घंटों को गुरुदेव चौपाल काल कहा करते हैं। इन्ही घंटों में उनके तमाम शिष्य गण उनके दर्शन कर अपनी जो भी शंकाऐं होते हैं उनके सामने रखते हैं और गुरुदेव अपनी सामर्थ्य भर उनका निवारण करने की कोशिश करते हैं।

आज भी रोजाना उनके दरबार में हाजिरी लगाने वाला एक शिष्य वहाँ पहुंच गया।

गुरुदेव चाय पी रहे थे। आँखें उनकी बंद थीं और वे चाय की चुस्कियों के बीच संतूर वादन का आनंद ले रहे थे। शिष्य चुपचाप बैठ गया। यह तो स्पष्ट था कि उसे कुछ पूछने की जल्दी थी पर वह अपनी बैचेनी पर काबू पाने में सफल रहा। कुछ मिनटों बाद ट्रैक खत्म हुआ तो गुरुदेव ने आँखें खोलीं।

शिष्य ने लपक कर क्षण पकड़ लिये और अपना प्रश्न दाग दिया,” गुरुदेव एक बात बताइये, ये गज़ल क्या है। जिसे देखो गज़ल की बात करता दिखायी देता है“।

प्रिय मित्र, गजल को जानने के लिये कुछ शब्दों का जानना जरुरी है। शे’र नाम से तो तुम परिचित हो ही। चलों यूँ कर लेते हैं कि तुम थोड़ा गृहकार्य ले लो। हफ्ता दस दिन लग कर कुछ शब्दों को अंदर से बाहर तक पूरा निचोड़ कर पी जाओ। इन शब्दों को नोट कर लो”।
अशआर“, “मतला“, “मकता“, “बहर“, “काफिया” और “रदीफ

गुरुदेव मुझे नहीं लगता कि लोग इन बारीकियों  को समझते हैं। वे तो किसी भी गीत को गज़ल की श्रेणी में रख देते हैं“।

मित्रवर अपनी मेहनत के पसीने का एक कतरा बहाये बिना सभी कुछ जान लेने का प्रयत्न न करो। जल्दी क्या है। इन शब्दों को ढ़ंग से जानो तो पहले और उनका गज़ल से सम्बंध जानो पहचानो “। इस मुद्दे पर शास्त्रार्थ तो बाद में हो ही जायेगा और लोगों के सामने“।

ठीक है गुरुदेव मैं इन शब्दों को घोटता हूँ जम कर। पर यह तो बता दीजिये कि क्या गज़ल सिर्फ और सिर्फ उर्दू में बनती है “?

नहीं मित्र, ऐसा भ्रम जरुर फैला हुआ है लोगों में। गज़ल तो एक विद्या है और इसे किसी भी भाषा में गढ़ा और कहा जा सकता है“।

एक बात और बता दूँ कि अभी हमने जिन तकनीकी बातों का जिक्र किया, समय के साथ हरेक विद्या में परिवर्तन आते हैं और लोग ऐसी गज़लें भी कहते रहे हैं जो इन तकनीकी व्याकरणों की हदों से बाहर निकल कर कुलाँचें मारती दिखायी देती हैं“।

और अंत में एक बात कि तकनीक का जानना ही जरुरी नहीं है गज़ल कहने के लिये, उसे गढ़ने के लिये|  उसमें अपने समझे हुये का सत्य नहीं होगा, और उसकी बुनियाद दिल की गहराइयों से आती भावनाओं के मिश्रण से नहीं बनी होगी तो मामला जमेगा नहीं | और यह बात सारे काव्यशास्त्र पर लागू होती है“।

शिष्य को उत्सुकता से अपनी ओर देखता पाकर गुरुदेव बोले,” चलो तुम्हे दो गज़ब की चीजें सुनाते हैं। छोटी हैं पर अर्थ गहरे लिये हुये हैं“।

इश्क को दिल में जगह दे नासिख,
इल्म से शायरी नहीं आती
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अब दूसरा सुनो


जिस्म की चोट से तो आँख सजल होती है,
रुह जब ग़म से कराहे तो गज़ल होती है
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