Posts tagged ‘Hawas’

नवम्बर 23, 2013

हर आहट पे लगता है कि तुम हो

आ आ के देखनाmera saya-001

हर एक मिनट में

मालूम हो जबकि

नहीं आना है कोई ख़त

समझना

नामवर के आने की

हर आहट को

मेरी बेचैनी का कुछ तो

अंदाजा हो रहा होगा तुझ को भी…

तेरे सुर्ख लबों से टपके

प्यार में डूबे

गीले से कुछ लफ्ज़

समेट रखे हैं मैंने उन फूलों में

जो मैं दे नही पाया तुझे अब तक

आ आ के लौट जाता हूँ फिर

जानता हूँ कि नहीं आने वाला

कोई ख़त अभी…

कभी बता पाया तो ज़रूर कहूँगा

बताने से पहले लेकिन

मेरा खुद जानना भी तो ज़रूरी है

कभी दिखा पाया तो जरूर पेश आऊंगा

मगर पहले मैं ये भी तो जान पाऊं कि…

कौन है तू….

क्या है तू….

क्यूँ तू इतने गहरी है मुझमे

क्या मेरे दिल में है…

अभी तो मैं खुद के हवास

में ही नहीं हूँ…

क्या तुझको बताऊंगा?

हर बार

हर इलज़ाम लेने से

तू इनकार कर देती है|

(रजनीश)

Advertisements
जुलाई 9, 2011

तुम्हारे बिना : सूना जीवन

हवस के अँधेरे में
मचलते हुए जिस्म
आग से भर जाते हैं
नस-नस जल उठती है
होश-ओ-हवास के परे
ना दिल ना दिमाग
कुछ भी तो
बाकी नहीं बचता।

फिर एक बार
अंगों का अभिशिप्त कंपन
चंद पल साँसों का तूफ़ान
पसीने की सड़न के साथ
तुम्हारे प्यार की खुशबु
लौटा लाता है,
सुला देता है नम आँखों को।

मेरी खो गयी दोस्त!

यूँ ही कट जाती है
किसी अजनबी बिस्तर पर
एक और ज़ख़्मी रात।

(रफत आलम)

%d bloggers like this: